न्याय मिलने तक बिक गए दो प्लॉट
न्याय मिलने तक बिक गए दो प्लॉट
चार माह की गर्भवती थी राजाराम की पत्नी

एटा।राजाराम के निधन के बाद उनकी पत्नी संतोषी चार माह की गर्भवती थी। उसके बेटी को जन्म दिया। वह बेटी आज 16 वर्ष की हो गई है। पांच बच्चों में सबसे बडी बेटी प्रेमलता की शादी कर दी गई थी। शादी के चार वर्ष वह उसका भी निधन हो गया। अब संतोषी के पास चार बच्चे है। पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण तीन बच्चे को तो सही से पिता का चेहरा भी याद नहीं है। बिना पिता की परवरिश के जीवन यापन कर रहे है। करीब दस वर्ष से यह लोग गांव से अलीगंज में रहने लगे थे। राजा का रामपुर में राजाराम की ससुराल थी।
एटा, कार्यालय संवाददाता। 16 वर्ष चार महीने तीन का समय। आंखों में आंसू। परिवार में कंगाली। जब कहीं जाकर भाई के हत्यारोपियों को सजा मिल सकी है। ना जाने कितने चक्कर लखनऊ के लगे, कितने चक्कर प्रयागराज के लगे। बुधवार को आए निर्णय ने वह दिन याद दिला दिया जिस स्थान पर घटना को अंजाम दिया गया।
थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव मिलावली निवासी शिव प्रकाश उर्फ पप्पू का बुधवार का दिन भाई राजाराम की याद में गुजरा। एक-एक दिन उसे याद है। राजाराम के बडे भाई ने बताया कि एक-एक दिन कैसे निकला है उसको हम बता नहीं सकते। हर दिन भाई याद आया है। परिवार में सबका चहेता भाई था। घटना के बाद न्याय पाने के लिए हमने अपना पूरा जीवन लगा दिया। अब तक हमारे दो प्लाट और जमीन भी बिक चुकी है। गांव में रहकर परिवार नहीं चल रहा था तो काम की तलाश में एटा आ गए। अपनी बात को अधिकारियों के सामने रखने के लिए एक-एक बार में 50-50 लोगों को लेकर लखनऊ और प्रयागराज जाते थे।
तीन वर्ष तक घर में नहीं रह पाए थे। कभी एटा तो कभी लखनऊ की भागदौड करनी पड़ रही थी। इन सभी कार्यों के लिए पैसे ही जरुरत होती थी। कोई काम धंधा पूरे परिवार पर रहा नहीं था। ऐसे में प्लाट जमीन ही बेच देते थे। जब बुधवार को निर्णय आया पिता भगवान सिंह की आंखे भर आई। वह चाहते थे कि हत्यारोपियों को वहीं सजा मिले जो मेरे बेटे को मिली थी। बिना किसी अपराध के उसे मौत के घाट उतार दिया गया।