
शासन का आदेश कि 3 महीने में ई-रिक्शा शहर के मुख्य सड़कों पर नहीं चलेंगे यह तो पहले से ही था लेकिन अन कोन प्रकरण के जरिए ई-रिक्शा को धुआंधार बिक्री की गई और रजिस्ट्रेशन किया गया और इसी तरह जहां ढाई हजार ई-रिक्शा की जरूरत है वहां 25000 ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया अब शासन और प्रशासन के लोग यह बताएं कि बनारस में 2600 रिक्शा चलने का आरटीओ विभाग बताता है और बनारस में 25000 से ऊपर ई रिक्शा चल रहा है मुख्य सड़क से बाहर किया जाएगा तो बाकी ई रिक्शा का क्या होगा और उसमें 90 परसेंट फाइनेंस ई-रिक्शा है इसके लिए प्रशासन और शासन के पास क्या इंतजाम है और इनका परिवार कैसे जिएगा इस बेरोजगारी के दौर में यह 20 हजार से ज्यादा ई रिक्शा चालक या ई-रिक्शा स्वामी क्या करें क्या प्रशासन के पास इनके विकल्प का कोई खाका तैयार है या फिर इन्हें डंडे के बल पर मार कर भगा दिया जाएगा तो फिर यह क्या करें और बनारस की क्या उत्तर प्रदेश की कोई भी यूनियन इस मुद्दे पर अपनी कोई बात नहीं रख रही है और रखे भी क्यों उन्हें क्या है अगर ढाई हजार भी रिक्शा चलेंगे और एक रिक्शे से अगर यह ₹20 लेंगे तो 5000 से ऊपर इनकी जेब में आएंगे इनको अपनी जेब से मतलब है बाकी ई रिक्शा चालक क्या करेंगे उस से क्या लेना देना तो मैं प्रशासन और शासन से यह विनम्र निवेदन करूंगा बिल्कुल आप इनको मुख्य रोड से हटाकर लिक रोड पर चलाएं लेकिन जितने ही रिक्शा रजिस्ट्रेशन हुए हैं उनको भी कोई विकल्प दे वरना आने वाले दिनों में गलत कामों में का बढ़ावा मिलेगा क्योंकि जीने के लिए कुछ तो करना होगा जब लोगों को काम नहीं मिलेगा रोजगार नहीं मिलेगा तो फिर चोरी करेंगे लूटपाट करेंगे तमाम तरह के संवैधानिक कार्य होंगे और इसका जिम्मेदार पूरी तरह शासन और प्रशासन होगा मुख रोड पर यह रिक्शा ना चलाएं लेकिन जितने भी रिक्शा करें रजिस्ट्रेशन हुआ है उनके विकल्प के लिए भी कोई ना कोई तरीका बनाया जाए ताकि कोई भी रिक्शा चालक मजबूरी में कोई गलत काम करने को बाद ना हो और मैं तमाम यूनियन से निवेदन करूंगा इस मुद्दे पर बैठकर अधिकारियों से बात करें और कोई बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए एक साथ मिलकर प्रशासन के साथ काम करें
जुबेर खान बागी राष्ट्रीय अध्यक्ष परिवहन फोरम भारतीय मीडिया फाउंडेशन