
बहन की हत्या कर उसके दोस्त को तलाशा
आगरा, प्रमुख संवाददाता। सुपारी किलर ओपी और लाला का हत्यारोपी भतीजे निक्कू चौधरी की तलाश में पुलिस टीमें दूसरे राज्यों में दबिश दे रही हैं। बहन की हत्या के बाद आरोपित ने उसके एक दोस्त को भी तलाशा था। चर्चा है कि दोस्त भी निशाने पर था। वह दोस्त पिता की वसीहत में गवाह है। निक्कू ने एक गवाह को तोड़ लिया था। दूसरे ने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया था।
शनिवार को जोगीपाड़ा, शाहगंज में निक्कू चौधरी ने अपनी बहन पूनम चौधरी और भाभी नीलू चौधरी पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। पूनम को दो गोलियां लगी थीं। उसकी मौके पर मौत हो गई थी। एक गोली नीलू के हाथ में लगी थी। उन्होंने दौड़कर अपनी जान बचाई थी। सूचना पर आए रिश्तेदारों ने बताया था कि बहन-भाई के बीच संपत्ति का विवाद चल रहा था। इंस्पेक्टर शाहगंज जसवीर सिंह सिरोही ने बताया कि पूनम की हत्या का मुकदमा नीलू चौधरी ने लिखाया है। पोस्टमार्टम के बाद पूनम का शव उसकी भाभी नीलू और बुआ के सुपुर्द किया था। उन्होंने ही शव का अंतिम संस्कार किया।
एसपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि एसओजी की टीम हत्यारोपी निक्कू चौधरी की तलाश में दबिश दे रही है। दो टीमों को शहर से बाहर भी भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो पुलिस को उसके बारे में अहम सुराग मिले हैं। जानकारी मिली है कि वह हत्या के बाद कार से फरार हुआ था। पूनम का एक दोस्त भी उसकी आंखों की किरकिरी बना हुआ है। वह उसके साथ भी घटना कर सकता था। चर्चा है कि निक्कू पहले उसे ही मारना चाहता था। विवाद बहन से हो गया। बहन की हत्या के बाद निक्कू ने उसके दोस्त को तलाशा था।
दोस्त है वसीहत में गवाह पूनम चौधरी के दोस्त एक मुस्लिम युवक से है। पूनम चौधरी उसके साथ मिलकर ब्यूटी प्रोडक्ट का व्यापार शुरू किया था। पूनम के पिता यतेंद्र सिंह ने अपनी वसीहत में उस युवक और लखन गोस्वामी को गवाह बनाया था। वसीहत में पृथ्वीनाथ चौकी क्षेत्र की एक प्रोपर्टी को पूनम के नाम किया था। इस प्रोपर्टी में तीन किराएदार हैं। आरोप है कि पिता की मौत के बाद निक्कू चौधरी किराएदारों से किराया वसूलने लगा था। पूनम ने इसका विरोध किया था। उसी के बाद विवाद शुरू हुआ था। पहले भी मारपीट हुई थी। पूनम ने आगरा से लेकर लखनऊ तक शिकायत की थी। शाहगंज पुलिस ने उस पर कार्रवाई नहीं की। पूनम ने पुलिस को बताया कि भाई हत्यारोपी है। अवैध हथियार रखता है। पुलिस ने फिर भी उसके घर तलाशी नहीं ली। पुलिस ने सख्ती दिखाई होती तो शायद यह नौबत नहीं आती। निक्कू की दहशत में वसीहत के एक गवाह ने समर्पण कर दिया था। वह निक्कू के कहने पर कोई भी बयान देने को तैयार हो गया था। दूसरा गवाह उसकी बातों में नहीं आया था।