दो और दो पांच करने का असफल प्रयास
आगरा को संक्रमित मॉडल बालों ने ही कराया
(आत्मसात कलम का )
ईमानदारी से तो आगरा को कोरोना के संक्रमण फैलाने का दोषी वो है जिसने 7 मॉर्च को पारस अस्पताल की विसंक्रमित कार्रवाई कागजों पर दर्शायी । स्पॉट पर जा कर जिलाधिकारी एस एस पी व सी एम ओ को कार्रवाई को अंजाम देना चाहिए था । अगर ये हुआ होता दो बार की अस्पताल की सील कार्रवाई फौरी साबित न होती । दोनों ही बार 53 व 73 मरीज होने की गलत जानकारी दी गई । मजे की बात तो ये रही शिकोहाबाद की महिला जब मरी तब और दूसरे दिन फरखबाद की महिला मरी तब दोनोंके सेम्पल लिए जो पोजटिव मिले । इतना ही नहीं 12व 13 को भी किसी ने जाके नहीं देखा । पारस अस्पताल का प्रबंधन जैसे प्रशासन ही हो । मगर पानी सिर से ऊपर तब मिला जब शासन के आदेश पर मामला हल्की धाराओं में दर्ज होने बाद अस्पताल को खंगाला गया तो दी जानकारी के विपरीत संख्या में मरीज मिले । इस समय भी प्रशासन चेत जाता तो भी ठीक था मगर एफ आई आर की औपचारिकता भर करना मिली भगत उजागर हुई । ना तो महिलाओं की मृत्यु के लिए जवाब देही पारस को ठहराया और नाही शासन ने इस गलती के लिए जिससे दो महिलाएं मरीन व 11 जिलों तक संक्रमण फैलाने के दोष को रा सु का की धारा से पाबंद करने की सिफारिश ही की गई । कर्तव्य परायण प्रशासन की पूरी टीम क्या वही थी जो आगरा मॉडल मेकर थी । अकेले सी एम ओ की हिम्मत नहीं आगरा को समूची उस टीम ने कोरोना को बेच दिया जिसने डाक्टर जेन व प्रबंधक यादव से भृष्ट आचरण में भागीदारी निभाई दोषी हैं ।
अभी भी समय है आगरा को संभालना है तो ऐसे भृष्ट आचरण के संक्रमित अधिकारी व कर्मचारियों के साथ अस्पताल का मालिक व प्रबंधक गिरफ्तार न ही किए जाते हैं । अभी 33 संक्रमित पारस के हैं जैसे जैसे नाम पते मिल रहे हैं नम्बर बढ़ते जा रहे हैं । आगरा को जमातियों व पारस ने मिलकर खूब धोया है जिससे वह प्रदेश का अव्वल संक्रमित जिला है । बधाई दें दोनों को या विदाई ।
इन सबके साथ ही पत्रकार भी कम दोषी नहीं जिन्होंने केवल विज्ञप्तियां ही छापी अपना कुछ जोड़ने की जिमेदारी नहीं निभाई जिससे वे प्रेस कांफ्रेंस स्तर के ही ब कर रह गए । अभी भी समय है अपने आगरा को कोरोना रहित करने का मिसन अख्तियार कर इस भूल को सुधारें ।
(माफ करें सच से में बच नहीं सकता )
-शंकर देव तिवारी