कार्य काल अवधि पूर्ण होने तथा ई.वी.एम. मशीन से बार काऊंसिल उत्तर प्रदेश चुनाव कराये जाने की उठी मांग

कार्य काल अवधि पूर्ण होने तथा ई.वी.एम. मशीन से बार काऊंसिल उत्तर प्रदेश चुनाव कराये जाने की उठी मांग

पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपरांत सी. ओ. पी. नवीनीकरण की नोटिस बार काऊंसिल उत्तर प्रदेश ईलाहाबाद द्वारा जारी हो गयी तथा माननिय न्यायालय के हस्कक्षेप से स्थगित है परंतु वर्ष 2018 में बार काऊंसिल उत्तर प्रदेश के संपन्न चुनाव में निर्वाचित पचीस सदस्यगण का पाँच वर्ष का कार्यकाल

कुछ ही माह में पूर्ण होने के करीब है और मौज़ुदा चेयरमैन एडवोकेट श्री मधुसूदन तृपाठी/ एडवोकेट श्री पाचू राम मौर्या ( छः- छः माह के लिए) व उपाध्यक्ष एडवोकेट श्री जय नारायण पांडेय व समस्त कार्यकारीनी/पदाधिकारीगण पता नहीं क्यों आगामी चुनाव प्रक्रिया की घोषणा नहीं कर रहे हैं जिससे पंच वर्सिय कार्य काल के कुछ ही महीने में पूर्ण होने के उपरांत उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता मतदाता व प्रत्याशीगण चुनाव में”नये प्रत्याशी को अवसर तथा विगत कई दशकों से विराजमान सदस्य को विश्राम ” को धार देने में अपने को असफल पा रहे हैं।
आम अधिवक्ता बार काऊंसिल उत्तर प्रदेश की वर्ष 1961 से चली आ रही वरीयता क्रम चुनाव पध्दति के स्थान पर सीधी व सरल ई. वी. एम. चुनाव पढ्ढती लागू किये जाने की माँग कर रहे हैं जिससे समय व धन की बर्बादी व साल- साल भर होने वाली मनऊबाऊ व अनावश्यक खर्चीली मतगड़ना ( जैसा की आप सभी अवगत हैं की प्रदेश बार काउंसिल उत्तर प्रदेश प्रयागराज ( ईलाहाबाद) का पाँच वर्ष के अंतराल पूर्ण होने के बाद प्रदेश भर के अधिवक्ता भाइयों- बहनों द्वारा कुल पचीस सदस्यों का निर्वाचन चुनाव वरीयता क्रम चुनाव पध्दति द्वारा किया जाता है जिसमें कई महीनें मतदान व लगभग एक वर्ष के उपर मतगड़ना में समय व धन की बर्बादी होती है) पर लग सके अंकुश।
अधिवक्ता बंधुओं की समस्त संस्थाओं/बार एसोसिएशन एवम पैत्रिक संस्था बार काऊंसिल उत्तर प्रदेश प्रयागराज (ईलाहाबाद) का चुनाव कार्य काल पूर्ण होते ही समय पर होना आवश्यक है, कारण है की समाज की निगाहें देश की आजादी में मुख्य भूमिका निभाने व योगदान देने वालेअधिवक्ता बंधुओं की संस्था पर रहती हैं और समय व नियम- कानून के नज़रंदाज़ व विपरीत जाने पर समाज उंगली उठाते हुए कहता है “जब अधिवक्ता बंधुओं की संस्था ही नियम कानून का पालन नहीं करेगी उस दशा में आम संस्थाओं से अपेक्षा करना व्यर्थ” की टिप्पड़ी से मान- सम्मान व बार की प्रतिस्ठा व वकालत पर अनावश्यक कुठाराघात होता है।

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks