
*“एमसीएच विंग में पहुंचते एजेंट*
एटा – मेडिकल कालेज की एमसीएच विंग में गर्भवती महिलाओं को अपंजीकृतों के यहां पहुंचाने वाले एजेंट आशा बनकर आते हैं। स्वास्थ्य विभाग के प्रसव केंद्रों तक गर्भवती को लाने का कार्य आशाओं के माध्यम से कराया जाता है। क्षेत्रवार कार्य कर रही आशा अपने-अपने क्षेत्र की गर्भवती का सुरक्षित प्रसव कराने का कार्य करती है। इसके एवज में स्वास्थ्य विभाग निर्धारित धनराशि देता है।”
मेडिकल कालेज की एमसीएच विंग से शहर में संचालित हो रहे अपंजीकृत प्रसव केंद्रों पर गर्भवतियों को भेजा जा रहा है। उसके लिए प्रसव केंद्रों के सक्रिय एजेंट गांवों से आने वाली गर्भवती महिला को टारगेट बना रहे हैं। इनको सामान्य प्रसव कराने के बहाने अपंजीकृतों के यहां पहुंचाकर मोटा कमीशन पा रहे हैं।
मेडिकल कालेज की एमसीएच विंग में ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली गर्भवती महिलाओं का परीक्षण कर प्रसव कराया जाता है। सोमवार की दोपहर को एक प्रसूता दिखाने के लिए पहुंची। जांच कराने के बाद डाक्टर ने उसे ऑपरेशन बता दिया। प्रसूता के साथ आईं महिलाएं आपस में चर्चा कर रही थी कि इसी समय एक महिला आकर खड़ी हो गई। पहले तो वह इन महिलाओं की बातों को सुनने लगी। इसी बीच वह अपनी राय देने लगी। कुछ ही देर में प्रसूता के साथ आई महिलाओं से बोली हमारे साथ लेकर चलो, हम बिना ऑपरेशन के प्रसव करा देंगे। उसने प्रसव कराने वाली एक महिला का नाम बताया। कुछ समय तक बातें हुईं। उसके बाद महिलाएं प्रसूता को ई-रिक्शा में बैठाकर ले गई। वह महिला अपने आप को आशा बता रही थी। मरीज ले जाने के एवज में अपंजीकृत प्रसव *केंद्र संचालक उनको दो से तीन हजार रुपये कमीशन देते हैं।*