मौके पर पहुँचे अधिकारी जमकर होरही डीएपी खाद की काला बाज़ारी
डीएपी खाद की कालाबाजारी से किसान परेशान

एटा।जलेसर-डीएपी खाद के लिए जलेसर में किसानों के बीच मारामारी हो रही है सादाबाद अड्डा जलेसर पर कृभको कम्पनी की डीएपी खाद के सैकड़ों बैग 2000 रुपये प्रति बैग बेचे जा रहे थे सूचना पर पहुंचे उपजिलाधिकारी रामनयन ने उर्बरक बिक्रेता को उचित रेट पर डीएपी बेचने की हिदायत दी। खाद के लिए किसानों को सरकारी गोदामों में लंबी लाइन लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके बावजूद पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से किसानों में आक्रोष है।
किसानों ने बताया कि रबी फसल की खेती की शुरुआत के साथ ही खाद की भारी किल्लत हो गई है। जिस कारण जलेसर क्षेत्र में किसानो को घंटो लाइन में लगकर खाद लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सुबह से शाम तक लाईन में खड़े होने के बाद भी शाम को खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। जलेसर क्षेत्र में मांग के मुकाबले सिर्फ 50 फीसदी ही डीएपी खाद उपलब्ध है।
किसानों ने कहा बारिस के कारण जलेसर के किसान पहले से ही परेशान हैं अब पारंपरिक तरीके से गेहूँ, सरसों, आलू की खेती के लिए भूमि तैयार करने के साथ ही फसल लगाना है, लेकिन उर्वरक की कमी किसानों को सबसे अधिक परेशान कर रही है।
किसान बताते हैं कि रबी फसलों की खेती इस बार काफी विलम्ब से शुरू होगी लेकिन अब खाद ही नहीं मिल रही है। मक्का, आलू, सरसों की फसल लगाने से पूर्व किसानों को उर्वरक खरीद कर रखना पड़ता है लेकिन घंटों लाइन में लगने के बाद भी डीएपी खाद नहीं मिल रहा है। किसानों ने बताया कि कुछ महीना पहले तक डीएपी की कीमत 1350 रुपए प्रति बैग थी लेकिन अब जब रवि फसल लगाने का समय आया तो बाजार में डीएपी की कीमत 1600 रुपये से 2000 रुपए तक प्रति बैग हो गई। वहीं कृभको गोदाम सचिव जगवेन्द्र सिंह द्वारा बताया गया कि हमारे गोदाम पर गेंहू बीज, यूरिया, पोटाश पर्याप्त मात्रा में स्टॉक है, डीएपी खाद आने पर तत्काल रूप से किसानों को दी जाएगी। वहीं बाजार में 240 रुपए का नैनो खाद लेना अनिवार्य कर दिया गया है। जिस कारण किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। वहीं किसानों ने मीडिया के द्वारा सरकार से गुहार लगायी कि यूरिया तथा अन्य उर्वरकों के साथ कोई अन्य उत्पादों जैसे सल्फर, कैल्शियम, जाइम एवं अन्य उत्पादों की टैग की बिक्री नहीं की जाये यदि किसी कंम्पनी व थौक उर्वरक विक्रेता द्वारा यूरिया या डीएपी के साथ किसी अन्य उर्वरक को टैग कर बिक्री की जाती है तो कम्पनी के पदाधिकारी, थाेक विक्रेता के विरूद्ध एफसीओ 1985 एवं इसीएक्ट 1955 के तहत कठोर कार्रवाई करें वहीं स्थानीय किसानों का कहना है कि जलेसर बाजार में उर्वरक बिक्रेता महंगे दर पर डीएपी खाद बेच रहे हैं