डीएपी लेने वाले किसानों की सुबह से शाम तक लाइनें लगी रहती हैं,लेकिन नहीं मिलती खाद

*डीएपी लेने वाले किसानों की सुबह से शाम तक लाइनें लगी रहती हैं,लेकिन नहीं मिलती खाद, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा – दीपावली का अवकाश खत्म होने के बाद सहकारी समितियों पर डीएपी लेने वाले किसानों की सुबह से शाम तक लाइनें लगी रहती हैं। भीड़ अधिक होने के कारण किसानों के बीच खाद के लिए मारामारी बनी हुई है। संबंधित विभागों के अधिकारी किसानों की इस समस्या पर लापरवाह बने हुए हैं।

शुक्रवार को नवीन खाद्यान्न मंडी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर सुबह पांच बजे से ही डीएपी लेने के लिए पुरुषों के साथ सैकड़ों महिला किसानों की लाइनें लगना शुरू हो गईं। खाद केंद्र खुलने के समय दस बजे तक केंद्रों पर 500 से अधिक किसानों की लाइनें लग चुकी थीं। केंद्र प्रभारी ने किसानों के आधार कार्ड एवं जमीन के कागज को जमा किया। उसके बाद खाद वितरण शुरू किया गया। वितरण कार्य के दौरान केंद्र प्रभारी पहले उन किसानों को ही खाद देते रहे जो उनके परचित थे। बाकी सुबह से लाइन लगाकर खड़े किसानों को घंटों तक डीएपी नहीं दी गई। सुबह से शाम तक लाइन में लगे बुजुर्ग एवं महिला किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घंटों लाइन में लगे किसान थक-हार कर लाइन वाले स्थान पर ही बैठ गए। केंद्र पर किसानों को पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं मिली। इतनी परेशानी उठाने के बाद भी शाम तक दर्जनों किसानों का डीएपी के लिए नंबर नहीं आया। शाम को पांच बजते ही केंद्र प्रभारी ने शेष बचे किसानों को कल आने की बात कहकर बगैर खाद दिए ही लौटा दिया।

सहकारी खाद भंडार पर नहीं मिली खाद शुक्रवार को गल्ला मंडी स्थित सहकारी खाद भंडार पर डीएपी खत्म होने से किसान आकर लौटते रहे। सुबह पांच से दस बजे तक लाइन लगाकर खड़े किसानों को जब पता चला कि केंद्र पर खाद नहीं है तो उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

“खाद केंद्र पर सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहे। उसके बाद भी डीएपी नहीं मिल सकी। खाद विक्रेता ने कह दिया कल आना। रोज लाइन में लगने के लिए हम बुजुर्गों के शरीर में दम नहीं है।

-गीता, गांव बहलोलपुर एटा

सुबह पांच बजे से खाद लेने के लिए केंद्र पर खड़े रहे। दिनभर लाइन में खड़े होने के बाद भी केंद्र प्रभारी बाद में आने वाले अपने परचितों को खाद देते रहे। घंटों बाद भी लाइन बिल्कुल आगे नहीं बढ़ी। अब कह दिया खाद कल मिलेगी।

-कंठश्री, गांव नगला धारा एटा”

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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