दरोगाजी के आगे सर्वोच्च न्यायालय की नसीहतें बौनी

दरोगाजी के आगे सर्वोच्च न्यायालय की नसीहतें बौनी

एटा। जी हां, ये पुलिस के दरोगाजी हैं। इनके आगे नियम-कानून यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय की नसीहतें तक बौनी हो जाती हैं। हर ओर सुलह-समझौते के माध्यम से विवाद निपटाए जाने की कोशिशें की जा रहीं हैं तो पुलिस की कार्यशैली इसमें रोड़ा बन रही है। ऐसा ही एक मामला निधौली कलां थाना क्षेत्र का सामने आया है। जहां दो पक्षों में विवाद हुआ और एक ओर से रिपोर्ट दर्ज करा दी गई।

बाद में वादी पक्ष ने इसे गलती मानते हुए कार्रवाई न करने को शपथपत्र दे दिए। इस आधार पर समझौता हो जाना चाहिए लेकिन मामले के विवेचक ने मुकदमा खत्म करने के लिए 20 हजार रुपये की मांग रख दी। साफ कहा कि रुपया विभाग में कई जगह बांटना पड़ता है। आरोपी पक्ष ने इसका वीडियो बना लिया।

इस वीडियो में आरोपी पक्ष की ओर से पूछा जा रहा है कि मामले का निपटारा किस तरह करना है? इस पर मुकदमे के विवेचक एसआई कहते दिख रहे हैं कि काम कराना है तो खर्चा करना पड़ेगा। आरोपी पक्ष की ओर से पूछा गया कि क्या खर्चा आएगा? दरोगाजी बता रहे हैं कि 20 हजार से कम में काम नहीं होगा। कई जगह रुपया बांटना पड़ता है। पांच हजार तो एसपी कार्यालय में ही चले जाते हैं। आरोपी दिहाड़ी मजदूर है, उसकी गरीबी का वास्ता देकर कुछ कम में काम कराने की गुजारिश आरोपी पक्ष की ओर से की गई लेकिन दरोगाजी ने इस पर साफ मना कर दिया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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