
“बांकेबिहारी मंदिर में सरकार के हस्तक्षेप पर सेवायतों को एतराज”
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी पर हुई भगदड़ की घटना की पुनरावृति रोकने को राज्य सरकार की योजना का मंदिर का प्रबंध देखने वाले सेवायतों ने घोर विरोध किया है। मंदिर का रखरखाव और बांकेबिहारी की पूजा करने वाले गोस्वामी परिवार ने हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान अर्जी दाखिल कर राज्य सरकार की योजना का विरोध किया।
सेवायतों का कहना है कि मंदिर पूरी तरह से प्राइवेट है। इसमें सरकारी अधिकारियों का हस्तक्षेप किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। सेवायतों ने कॉरिडोर बनाने के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली पांच एकड़ जमीन को खरीदने में मंदिर के फंड का उपयोग करने पर भी विरोध जताया। इस पर मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल एवं न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि सरकार कॉरिडोर के लिए जमीन खरीदने और फिर कॉरिडोर के रखरखाव का खर्च उठाने के लिए तैयार है। हाईकोर्ट बांके बिहारी मंदिर में भगदड़ की घटना रोकने को दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
सरकार की योजना
सरकार की योजना के अनुसार मंदिर के पास यमुना की ओर खाली पड़ी पांच एकड़ जमीन सरकार अधिग्रहीत कर कॉरिडोर बनवाएगी। खर्च मंदिर के चढ़ावे की रकम से लिया जाएगा। मंदिर के रखरखाव के लिए ट्रस्ट बनेगा जिसमें सेवायत परिवार के अलावा दो अधिकारी भी शामिल होंगे।
सेवायतों का विरोध
सेवायत परिवार के अनुसार, मंदिर में सेवा का अधिकार सिर्फ एक परिवार को है। यह पूरी तरह प्राइवेट मंदिर है सरकार को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। यदि मंदिर के प्रबंधन और फंड में सरकारी अधिकारियों का हस्तक्षेप होगा तो फंड का दुरुपयोग शुरू हो जाएगा।