
दरगाह परिसर की खोदाई में मिलीं हनुमान-शनिदेव की प्रतिमाएं, भाजपा विधायक कर चुके हैं मंदिर का दावा
एटा – स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पूर्व में शनिदेव मंदिर था। दरगाह बाद में अतिक्रमण कर बनाई गई। जात की धार्मिक मान्यता मंदिर की ही है।
खोदाई के दौरान मिली प्रतिमा
जलेसर की बड़े मियां दरगाह मामले में शुक्रवार को नया मोड़ आया है। परिसर में पुलिस चौकी स्थापना के लिए नींव की खोदाई कराई जा रही थी। खोदाई में हनुमानजी और शनिदेव की प्रतिमाएं मिली हैं। प्रतिमाएं मिलने के बाद इनका शुद्धिकरण किया गया। शनिदेव की प्रतिमा का तेल से अभिषेक किया गया। दोनों प्रतिमाओं को फिलहाल परिसर के एक ओर बने विश्राम गृह में रखवा दिया गया है।
दरगाह परिसर में बड़े मियां की मजार के करीब 10 मीटर दूरी पर ही यह खोदाई शुक्रवार सुबह एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री और सीओ इरफान नासिर खान की देखरेख में शुरू कराई गई। इस दौरान सुबह करीब 11 बजे एक श्रमिक को फावड़े के नीचे कुछ टकराने का अहसास हुआ। इस पर उसने हाथों से मिट्टी हटाकर देखा तो शनिदेव की पत्थर से बनी प्रतिमा उल्टी दबी हुई मिली। मिनटों में यह खबर पूरे जलेसर में फैल गई।
इसके करीब एक घंटे बाद कुछ ही दूरी पर एक छोटी हनुमान प्रतिमा भी मिट्टी में दबी मिली। जानकारी पर विधायक संजीव दिवाकर दरगाह परिसर पहुंच गए। ज्योतिषी को बुलवा लिया गया और प्रतिमाओं का शुद्धिकरण कराया गया। विधायक संजीव दिवाकर ने शनिदेव की प्रतिमा पर तेल अर्पित किया। कुछ समय बाद एटा से एडीएम प्रशासन आलोक कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक धनंजय सिंह कुशवाह भी पहुंच गए। उन्होंने पूरी स्थिति का जायजा लिया।
ये बोले विधायक
प्रतिमाएं निकलने के बाद पहुंचे जलेसर विधायक संजीव दिवाकर बोले कि यहां दरगाह नहीं थी, मंदिर है और रहेगा। उन्होंने कहा कि इसी परिसर में प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी।
एएसआई की टीम पहुंचकर यहां नमूने लेगी। जिससे प्रतिमाओं की प्राचीनता पता लग सके। बता दें कि भाजपा विधायक व स्थानीय लोग पहले ही दरगाह परिसर में शनिदेव का प्राचीन मंदिर होने का दावा करते रहे हैं। कहा जाता था कि शनिदेव की प्रतिमा को दबा दिया गया था। अब प्रतिमा खोदाई में निकलने से शनिदेव मंदिर के अस्तित्व पर नई बहस शुरू हो गई है।