इंसान क्या जानवर भी भूख से तिलमिला उठते हैं साहिब

कोविड-19 से खौफ नहीं – रोटी के लिए जारी है जगं
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जिन्दा गर रहेगें तो कोरोना को भी कर देगें नेस्तनाबूद
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इंसान क्या जानवर भी भूख से तिलमिला उठते हैं साहिब
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एटा ! वैश्विक महामारी के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम के लिए भारत सरकार के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा घौषित चौथे चरण के लॉक डाउन से पूर्व तमाम हालातों से समझौता करते हुए हालांकि एटा जिले के साहसी एवं पराक्रमी नागरिकों ने कोविड-19 के महानायकों , महायोद्दाओ, कोरोना वारियर्स, कोरोना फाइटर्स आदि के सयुंक्त नेतृत्व में लडी गई पहली जगं में जिले को कोरोना मुक्त करने में कामयाबी तो हासिल कर ली है, लेकिन कोविड-19 से कतई नही घबराने वाले ” हैन्ड टू माउथ ” लोगों की रोटी के लिए असली जगं अभी जारी है ! भारत सरकार और प्रदेश सरकार लाख दावे करे कि इस महामारी के दौर में हम हर उस अन्तिम व्यक्ति तक जो वास्तव में फ्री राशन एवं भोजन पाने का हकदार है, उसे किसी भी हालात में भूखा प्यासा नही सोने देगें! सच्चाई तो नजर आती है लेकिन प्रश्न उठता है कि आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा ! क्या भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के चौथे चरण के लॉक डाउन सम्बोधन में आत्म निर्भर भारत के सपने को ” हैन्ड टू माउथ ” स्तर के लोगों तक पहुंचा कर जब तक उन्हें आत्म निर्भर नही बनाया जाऐगा तब तक आत्म निर्भर भारत की कल्पना करना बैमानी होगी ! एटा जिले की एक पुरानी कहावत है कि एटा का बुरा लपेटा न बाप बचे न बेटा यह यहां के बहादुर लोगों ने लॉक डाउन के चौथे चरण से पूर्व ही कोरोना को जिले से भगाकर सिद्द तो कर दिया है ,लेकिन इस जिले की भयावह बेरोजगारी के चलते दो वक्त की रोटी के लिए चाहे जिला पंचायत का सामुदायिक रसोई घर हो अथवा ठन्डी सडक स्थिति ग्रीन गार्डन पर सदर विधायक विपिन वर्मा “डेविड ” की पहल पर गणमान्य लोगों के सहयोग से संचालित हो रही आपकी अपनी रसोई पर ” हैन्ड टू माउथ ” लोगों की भीड का अतिरेक यह दर्शाता है कि लोगों में कोविड-19 का खौफ नहीं है ! लेकिन जान की परवाह किए बिना पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी के लिए जगं जारी रहेगी, अब चाहे इसके लिए सोशल डिसटेन्स के नियम ही तार तार क्यों न हो जाऐं ! हमारे संवाददाता ने जब कोविड-19 से बचाव के लिए सोशल डिसटेन्स की धज्जियां तार तार होते देखी तो भूख मिटाने के लिए भोजन के पैकेट के इतंजार में खचाखच लगी लाइनों में खड़े कुछ लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि चिपटकर सटकर भीड करके खडे होने से कोरोना वायरस का खतरा हो सकता है तो पलट में एक नही अनगिनत जबाब आते हैं कि साहब पेट में गर रोटी होगी तो हम सभी लोग जिन्दा रहकर कोरोना को नेस्तनाबूद कर देगें! कोविड-19 से जंग लडने के लिए पेट में रोटी का निबाला चाहिए ! हम तो इंसान है साहिब भूख के लिए तो जानवर भी जगं ऐ मैदान कर देते हैं !

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