केंद्र सरकार द्वारा देशभर की बिजली कंपनियों (डिस्काम) की दिक्कतों को दूर करने के लिए घोषित पैकेज से राज्य की बिजली कंपनियों को भी काफी उम्मीदें हैं। राज्य की बिजली कंपनियों ने पहले से ही अपनी जरूरतें केंद्र सरकार को बता चुकी हैं। राज्य के पावर सेक्टर को करीब 15 हजार करोड़ मिलने की उम्मीद की जा रही है।
राज्य में विद्युत वितरण की पांच कंपनियां पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल तथा केस्को हैं। इनके अलावे पारेषण निगम, उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम भी हैं। इस समय पांचों वितरण कंपनियों के साथ ही उत्पादन निगम के सामने आर्थिक दिक्कतें हैं। उद्योग और व्यापार बंद होने तथा घरेलू बिजली बिल की वसूली नहीं हो पाने से कंपनियों के सामने बड़ी आर्थिक दिक्कतें हैं।
बिजली उत्पादन के लिए कोयला खरीदने, उत्पादन गृहों से बिजली खरीदने, मेंटनेंस का खर्च, कर्मचारियों का वेतन भुगतान आदि में दिक्कतें आ रही हैं। बताया जाता है कि प्रदेश की ये सभी बिजली कंपनियां पहले से ही करीब 85 हजार करोड़ रुपये के घाटे में हैं। ऐसी स्थिति में मौजूदा समय में आर्थिक दिक्कतों से उबर पाना इनके अपने बूते की बात नहीं रह गई है।