
मिड डे मील का रुपया फर्जीबाड़ा करके हड़पा,प्रधानाध्यपिका दूध की धुली बनी रही
एटा- विकास खंड सकीट में मिड-डे-मील के रुपयों का फर्जीवाड़ा करने वाली प्रधानाध्यापिका के खिलाफ दर्ज मुकदमे में गबन और भ्रष्टाचार की धारा न लगाए जाने का आरोप विवेचक पर लगाया गया है। एसएसपी को दिए पत्र में मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है।
फिरोजाबाद के जसराना निवासी पवन कुमार ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी भारती शाक्य ने न्यायालय के आदेश पर दर्ज कराए मुकदमे में आरोप था कि प्राथमिक विद्यालय डाडा चिलासनी में तैनात तत्कालीन प्रधानाध्यापिका मिथिलेश ने साल 2018-19 में विद्यालय के मध्याह्न भोजन निधि का खाता गलत तरीके से अपने परिचित रिश्तेदार का फोटो लगाकर व हस्ताक्षर कराके संचालित किया। मिड-डे-मील निधि के खाते का प्रपत्र कूटरचित तरीके से तैयार कर तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एसपी सिंह से खाते के संचालन की संस्तुति करा ली।
ग्राम प्रधान चिलासनी प्रतिनिधि ओमेंद्र कुशवाह ने इसकी शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर और बेसिक शिक्षा विभाग में की। विभागीय जांच में पाया गया कि अवैध प्रपत्र व परिचित व्यक्ति के हस्ताक्षर से दो वर्ष तक खाते से रुपया निकाला जाता रहा। जबकि नियम है कि मध्याह्न भोजन निधि के खाते का संचालन ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। इसके अतिरिक्त किसी अन्य के साथ धन का आहरण अवैध होगा।
पवन का आरोप है कि पुलिस विवेचक ने जांच आख्या में लिखा है कि मामला विभागीय अनियमितताओं से संबंधित है और प्रधानाध्यापिका को निलंबित किया जा चुका है। ऐसे में न्यायिक या पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। उन्होंने एसएसपी को भेजे पत्र में कहा है कि मामले में आईपीसी की धारा 409 व भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13 की केस में बढ़ोत्तरी कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।