
एटा मैनपुरी इटावा औरैया उरई जालौन कानपुर के प्रसिद्ध मट्ठा के आलू। ये हमारे उत्तर प्रदेश की शाही डिश है वो क्या है ना कि चाहे शादी बारात हो जन्मदिन हो भंडारा हो या किसी स्पेशल गेस्ट को खाने पर बुलाया हो और तो और किसी के परलोक सिधारने पर उनकी तेरहवीं में भी अगर मट्ठा के आलू नहीं मिले तो एक भी ऐसा इंसान नहीं मिलेगा जिसने नाक मुंह सिकोड़ कर ये ना बोला हो “अरे यार जू कोनऊ खाना है जामे मट्ठा के आलू तो हैई नई ” आप चाहे पनीर मशरूम मलाई कोफ्ता छोले या फिर कोई भी सब्जी बनवा लो और तो और चाहे छप्पन भोग भोग बनवा लो लेकिन मट्ठा के आलू का कोई जवाब नहीं। और केवल किसी प्रसंग में ही नहीं बल्कि हमारे यहां ज्यादातर घरों में सप्ताह में तीन चार बार तो बन ही जाती है ये सब्जी। और कोई मेहमान अचानक से आ गया और कोई सब्जी नहीं है घर में तब भी ये मट्ठा के आलू घर की इज्जत बचा लेते हैं क्योंकि घर में कुछ हो या ना हो आलू तो हमेशा होते ही और दही मट्ठा भी ज्यादातर घरों में रहता ही है बस फिर क्या है उबालो आलू और बना डालो उत्तर प्रदेश के शाही मट्ठा के आलू। हमारे घर में तो जब सब्जी के ऊपर महाभारत छिड़ी होती कि ये हम नहीं खाएंगे वो हम नहीं खाएंगे तो मम्मी को मट्ठा के आलू का ऑप्शन ही समझ में आता है क्योंकि इसके लिए कोई ये नहीं कह सकता कि हम ये नहीं खाएंगे बस फिर क्या है महाभारत खत्म। तो भईया जिसने मट्ठा के आलू कभी ना खाए हों तो उत्तर प्रदेश में कही भी चले आना मट्ठा के आलू मिल जाएंगे और अगर किसी कारणवश कहीं ना मिल पाए तो इटावा से लेकर औरैया तक किसी भी गांव छोड़ो किसी भी घर में आ जाना बड़े प्यार से मट्ठा के आलू खिलाए जाएंगे वो भी चावल और पूड़ी (पूरी) के साथ।