
विपक्ष पूरी तरह अप्रासंगिक होता जा रहा
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष का लाल किले पर न आना अप्रत्याशित नहीं था। भारत में विपक्ष पूरी तरह अप्रासंगिक होता जा रहा है। यह अत्यंत ही दुखद स्थिति है, किंतु इसके लिए जिम्मेदार भी कांग्रेस सहित विरोधी पार्टियां ही हैं। कांग्रेस ने वर्षों तक सत्ता की बागडोर अपने हाथ में रखी। बाद में उसके समर्थन से भी कुछ अन्य दलों ने शासन किया, लेकिन परोक्ष रूप से नेहरू-गांधी परिवार का ही दबदबा रहा। इन वर्षों में भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण ही सरकार की मुख्य नीति रही। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 2014 से शुरू हुआ, और उन्होंने आते ही शंखनाद कर दिया कि न खाएंगे, न खाने देंगे। पहले दिन से ही भ्रष्टाचार पर शून्य असहिष्णुता की नीति उन्होंने अपनाई, और यही नीति उनके शासन का मुख्य आधार भी रही है।
आज की हकीकत यही है कि विपक्ष के तमाम नेता भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपित हैं। वहां परिवारवाद और तुष्टिकरण की नीतियां हर समय नजर आती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 के चुनाव में वायदा किया था कि किसी भ्रष्टाचारी को छोड़ा नहीं जाएगा। सब जेल के अंदर रहेंगे। कोरोना संक्रमण काल में इस दिशा में बहुत काम नहीं हो सका, लेकिन प्रधानमंत्री दृढ़ प्रतिज्ञ रहे, और पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के समारोह में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ चतुर्दिक अभियान चलाने की घोषणा की। उन्होंने युवाओं से विशेष सहयोग मांगा। इसी के संदर्भ में महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना जैसे तमाम राज्यों में प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई, आईटी जैसी केंद्रीय एजेंसियों कार्रवाई की। कुछ नेताओं को तो जेल भेजने की तैयारी भी चल रही है।
उल्लेखनीय है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, लालू यादव जैसे तमाम नेताओं से पूछताछ हो चुकी है या उन्हें आरोपित किया जा चुका है। महाराष्ट्र के नवाब मलिक, दिल्ली के मनीष सिसोदिया, बंगाल के कई नेता जेल में हैं। 2024 से पहले कई अन्य राजनीतिक हस्तियों को जेल भेजने की तैयारी जांच एजेंसियां कर रही हैं। चूंकि प्रधानमंत्री ने इन एजेंसियों को खुली छूट दे दी है, इसलिए जांचकर्ता बिना दबाव के काम कर रहे हैं। जाहिर है, जनता की नजरों में विपक्ष के अधिकांश नेता भ्रष्ट हैं। जनता जानती है कि मोदी जैसा स्वच्छ छवि वाला प्रधानमंत्री ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़कर जीत हासिल कर सकता है। उनका नारा भी दिल को छू रहा है- भ्रष्टाचार क्विट इंडिया, परिवारवाद क्विट इंडिया, तुष्टिकरण क्विट इंडिया।