
आगरा, आशाराम इंटर कालेज जरार की हॉकी टीम ने जिला चैंपियन शिप जीती । उस टीम ने नगर की दिग्गज स्कूलों की टीमों को हराया । इस जीत पर ग्रह विद्यालय में उसका स्वागत किया गया । जबकि होना ये चाहिए था कि उस टीम को सार्वजनिक अभिनन्दन मिलना चाहिए था ।
मेने विद्यालय के प्रधानाचार्य मेंहदी हसन को फोन मिला बधाई दी । और अपने आपकी खुशी उनके साथ बांटा । आज से ४७साल पहले के स्वप्न को पूरा होते देखा । मैं उस समय दसवीं कर रहा था । आदरणीय गुरुजी वीरपाल सिंह भदौरिया जी हाकी की टीम भदवार कालेज की बना रहे थे । मैं भी तीन रुपए देकर एक पुरानी हॉकी लेकर शामिल हो लिया ।उन्होंने दस रुपया मांगे थे । वो सभी को सोलह रुपए वाली होकी दस में देकर खिलवाते थे । स्कूल के प्रधानाचार्य हॉकी की बॉल गुरु जीके कहने से मंगवा लेते थे । बहुत कुछ बीता…मगर एक दिन अमर उजाला में दस बजे खबर पढ़ी कि स्कूल्स की हाकी आगरा में होगी । हमने टीम इकट्ठी की और बस से आगरा पन्हुंचे । स्टेडियम में पता चला एंट्री तब होगी जब उन्हें कोई मैदान दिलवाओ । मैच दूसरे दिन से षडयंत्र था न खिलाने का । नेहरू भाई को घेरा वे तब आगरा में हमारे खेल के आदर्श थे । रात भर हम लोग जागे आगरा कालेज मैदान के लिए पर नहीं मिला और हमारी टीम नहीं खेल सकी । बाद में ७८-७९में हमनें आगरा आकर एक क्लब टीम बना उससे दो मैचों की श्रंखला शहर के मशहूर मैदान आगरकालेज और राजपूत कालेज के मैदानों पर खिलवाके अपनी जिद पूरी की । मगर स्वप्न था स्टेडियम में बाह की टीम खेलती ….
उस स्वप्न को जरार की टीम ने पूरा किया बहुत खुशी हुई
किलकारी भरके आज मैं हंसते हंसते रोया बेधड़क होकर
जल्द मैं इस टीम के खिलाड़ियों के साथ अपने अनुभव बांटूंगा । प्रधानाचार्य ने बताया मैदान भी है प्रेक्टिस होती हैं मुझे अपना वो बड़ा फील्ड याद आया जिसकी रक्षा मैं किसी खड़ी फसल की तरह करता था कोई मोटर लारी के घुसते ही उसे कबाड़े में बदल देता था । …..आज वहां एक स्कूल बन गया है ।
कल कोई वालीबाल एथलेटिक तैराक की तरह हॉकी की प्रतिभा देश से विश्व स्तर तक खेले बड़ी खुशी होगी ….
हम हों न हों खेल तो होगा बाह का नाम होगा