शहर में पॉलिथीन बैग के अलावा प्रतिबंधित डिस्पोजल का खुलेआम धड़ल्ले से उपयोग हो रहा, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा, प्रयोग होने के बाद सड़कों पर फेंकी जाने के कारण नाले, नालियों को चोक हो रहे हैं। तालाबों को प्रदूषित कर रही है। पालिका का दावा है कि रोजाना इसके लिए अभियान चल रहा है।
किराना, सब्जी, फल एवं जूस विक्रेता उपभोक्ताओं को खुलेआम प्रतिबंधित पॉलिथीन और डिस्पोजल में सामान रखकर दे रहे है। डेयरियों पर भी दूध संबंधी चीजे पॉलिथीन में पैक कर दी जा रही है। इतना ही नहीं रोजमर्रा में उपयोग होने वाली विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को भी दुकानदार 50 से 75 माइक्रॉन की प्रतिबंधित पॉलिथीन में ही रखकर दे रहे हैं। इतना ही नहीं शहर के अधिकांश ढाबो, चांट, पकौड़े और नास्ता की दुकानों पर प्रतिबंधित पॉलथीन के साथ सिंगलयूज प्लास्टिक से बने दौना, चम्मच, थाली, ग्लास आदि का जमकर उपयोग किया जा रहा है। ढाबों से खाना पैक कराने पर ढाबा संचालक उपभोक्ताओं को प्रतिबंधित पॉलिथीन और सिंगल यूज प्लास्टिक में ही खाना पैक कर दे रहे है।
शहर से प्रतिदिन निकलती है पांच कुंलत तक प्रतिबंधित पॉलिथीन एटा। शहर से प्रतिदिन 60 टन तक कूड़ा निकलता है। इसमें 60 फीसदी यानी 36 कुंतल गीला और 40 फीसदी यानी 24 कुंतल तक सूखा कूडा निकलता है। सूखे कूड़े में ही पांच कुंतल तक केवल प्रतिबंधित पॉलिथील और डिस्पोजल निकलता है।
प्लास्टिक खाने के कारण जानवरों को पेट संबंधी बीमारियां हो जाती है। पॉलिथीन और प्लास्टिक जानवरों की आंतों में फंस जाती है, जिससे वह गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर उसकी मौत भी हो जाती है।
-डॉ. अनिल कुमार सिंह, सीवीओ
पालिका में कर्मचारियों की कमी के कारण शहर में पॉलिथीन अभियान ठीक ढंग से नहीं चल पा रहा है। जल्द ही अभियान को शुरू कर पॉलिथीन और सिंगज यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
-सुशील गिरी, राजस्व प्रभारी, नगर पालिका एटा।