जलमग्न हुआ जनपद मुखिया का दरबार
कलेक्ट्रेट परिसर में भरा पानीं, औंधे मुहँ गिरे फरियादी व अधिवक्ता

एटा । शहर को स्वर्ग बनाने के चक्कर में शासन का धन हड़पने बालों ने नगर को किस तरह नरक बना दिया है शायद किसी से छुपा नहीं हैं । कछुआ गति से रेंगता सीवर कार्य और कागजों में चल रही विकास की आँधी से शहर मामूली बारिश के चलते जलमग्न हो उठता है । बाबजूद जनपद के जिम्मेदारों के साथ स्वयं नगर की जनता गाँधी जी के बंदर बनी हुई है । नतीजा कूड़ा करकट व सिल्ट से चौक नालियां और उबड़ खाबड़ गडडा बन चुकी सड़कें गली गलियारे खुद शहर की बदहाली की दास्तान बयाँ करती पार्टी हो रही हैं । पूर्व के गुजरे दिनों को छोड़ अगर आज के ताजा उदाहरण की बात करें तो चंद समय की बारिश ने जनपद मुखिया कार्यालय परिसर को ही जलमग्न कर दिया, जिसमें कई फरियादी और अधिवक्ताओं ने पटकें खाई …