तहसील अलीगंज क्षेत्र मे प्रधान पद के चुनाव में हार जीत का खेल – रिट की सुनवाई मे पूरी तरह हो गया फेल
पूर्व की मतगणना में की गई धांधली का पर्दाफाश 12 वोट जो निरस्त हुए थे उन्हें जीत में सामिल कर फर्जी तरीके से प्रधान की कर दी गई थी जीत पक्की
रिट की सुनवाई में एसडीएम के न्यायालय से एक एक वोट की पुनः मतगणना में फर्जीकरण का हुआ खुलासा – हारे हुए प्रधान पद के प्रत्याशी रीता को किया गया विजई घोषित

अलीगंज /एटा। ग्राम पंचायत चुनाव में भ्रष्टाचार के माध्यम से की गई धांधली का पर्दाफाश उसी वक्त हो गया था। लेकिन आज न्याय की लड़ाई हारे हुए प्रत्याशी के पक्ष में उस समय खड़ी दिखाई दी, जब पुनर मतगणना के दौरान न्यायालय एसडीएम अलीगंज के कक्ष में मतगणना प्रारंभ हुई उस दौरान पूर्व की मतगणना में किए गए हेरफेर की पोल खुलने से नहीं बच सकी, और निरस्त वोटो की संख्या विजई प्रत्याशी के पक्ष में जोड़ देने से फर्जी करण के माध्यम से चुने गए प्रधान की पोल भी खुल गई।
कुल मिलाकर वारह वह वोट पकड़ में आ गये जो निरस्त वोटो की गिनती में गिने जाने चाहिए लेकिन उस समय की मतगणना अधिकारी ने मनमाने तरीका से विजई घोषित की गई प्रधान पद की प्रत्याशी कविता पत्नी देवेंद्र सिंह कश्यप के नाम में जोड़ दिया और कविता को गलत तरीके से विजई घोषित कर दिया गया। आज हुई पुनर्मतगणना में बे 12 वोट निरस्त होने के कारण कविता के पक्ष से हटा दिया गये, जिसकी वजह से कविता के पक्ष मात्र 200 वोट ही गिनती में आ सके। इसी पूर्व में परास्त कराई गई रीता पत्नी रविंद्र सिंह निवासी ग्राम पंचायत गेवर अब्दुल्ला पुर, तहसील अलीगंज,एटा के वोटों की संख्या 208 वोट की गिनती बनी रही, जिसके चलते पूर्व में परास्त कराई गई रीता को 8 वोट से विजई घोषित कर दिया गया। रीता के पक्ष से रिट दायर करने वाले अलीगंज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अम्बरीष सिंह राठौर ने कानूनी दांवपेच के चलते एक- एक वोट की मतगणना कराने में कामयाबी हासिल की, जिसकी वजह से उनके क्लाइंट को प्रधान पद में विजई होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वही पूर्व में सांठगांठ के जरिए जिताई गई कविता को मात्र 200 वोट पर संतोष करके हार का मुंह देखना पड़ा है। कविता की ओर से एटा से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अरुण सोलंकी तथा अलीगंज तहसील के अधिवक्ता श्री ओम हरि सक्सेना द्वारा की गई थी। लेकिन इन अधिवक्ताओं के कानूनी तर्क श्री राठौर की तर्कों के आगे टिक नहीं सके और अंततोगत्वा सत्य की जीत हुई तथा असत्य ध्वस्त होने से बच नहीं सका।