गली-मोहल्लों में अवैध तरीके से संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों को नहीं है कार्रवाई का डर

गली-मोहल्लों में अवैध तरीके से संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों को नहीं है कार्रवाई का डर

अवैध तरीके से खुली कोचिंग सेंटरों पर आखिर कार्यवाही क्यो नही

एटा:जिले में इस समय अवैध तरीके से कोचिंग सेंटर कुकुरमुत्ते की तरह खुल गए है जिसमे छात्रों का शोषण समेत आये दिन गुटबाजी में छात्रों से झगड़ा फसाद होता रहता है।
जिले में छोटे छोटे कमरो में शिक्षा का व्यापार किया जा रहा है। जिसमें सरकारी शिक्षक सहित प्राइवेट अप्रशिक्षित शिक्षक छात्रों को शिक्षा देकर मनमाने तरीके से पैसा वसूल रहे है।
खास बात है कि इन शिक्षण केन्द्रो का कही भी रजिस्ट्रेशन नही है। जिससे जीएसटी और टैक्स की चोरी भी की जा रही है। लेकिन शिक्षा विभाग के साथ ही प्रशासन द्वारा मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

शहर की गली-मोहल्लों में कई अवैध कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे है, कोई फर्राटेदार इंग्लिश सिखाने का दावा करता है, तो कोई आईएएस,आईपीएस,टेट ,सुपर टेट क्वालीफाई कराने का। हालत यह है कि इन संस्थाओं द्वारा सभी प्रकार के कॉम्पटीशन क्वालीफ़ाई कराने के दावे किए जाते हैं।
हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की परीक्षा की तैयारी और कॉम्पटीशन कराने वाले कोचिंग की शहर में भरमार सी हो गई है। यह कोचिंग संचालक मनमाने तरीके से छात्रों से फीस वसूल रहे हैं। लेकिन इन कोचिंग संचालकों के खिलाफ जिला प्रशासन अलर्ट नहीं है। शहर के रिहायशी क्षेत्रों में अधिकांश अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटर आम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। नगर के कुछ कोचिंग सेंटरों को छोड़ दे , तो किसी का भी पंजीयन नही है और न ही इन्हें खोलने के लिए कोई स्थान सुनिश्चित किया गया है।
कोचिंग सेंटर संचालकों द्वारा फीस तो मनमुताबिक ली जाती है। लेकिन इन सेंटरों में छात्र-छात्राओं द्वारा सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नसीब नहीं होता है। इन सेंटरों में न तो छात्राओं और न ही छात्रों के लिए टॉयलेट की कोई सुविधा होती है और न ही गर्ल्स के लिए चैंजिंग जैसी कोई सुविधा। इसके अलावा पानी के लिए भी कोई सुविधा नहीं मिलती है।

जिले में आधा सैकड़ा से अधिक सेंटर संचालित

एक अनुमान के अनुसार जिले में एक सैंकड़ा से भी अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। शहर में केवल गिने चुने ही सेंटर वैध संचालित हैं। अन्य के पास रजिस्ट्रेशन तक भी नहीं है। रिहायशी क्षेत्र में पार्किंग एवं पर्याप्त जगह की व्यवस्था के बगैर संचालक कोचिंग सेंटर नहीं चला सकते। लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण कोचिंग सेंटर के संचालक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। छात्र मुख्य सड़क पर अपने वाहन खड़े कर देते है। इससे स्थानीय लोगों के अलावा राहगीरों को सड़क पर चलने में परेशानी हो रही है। यह संचालक अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं। कोई भी शासकीय शिक्षक बच्चों को ट्यूशन नहीं पढ़ा सकता, लेकिन शहर के अधिकांश शासकीय शिक्षक अपने घरों पर बेधड़क ट्यूशन पढ़ा रहे हैं।

टैक्स की हो रही चोरी

कोचिंग सेंटरों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है। लेकिन कोचिंग सेंटरों द्वारा छात्र-छात्राओं को फीस की पक्की रसीद नहीं दी जाती है। इनके द्वारा टैक्स की चोरी की जा रही है।

सड़कों पर लगता हैं जाम

अधिकतर कोचिंग सेंटर शहर की मुख्य सड़कों पर संचालित किए जा रहे हैं, जिन पर पार्किंग की व्यवस्था न होने के चलते सड़कों पर जाम जैसे हालात निर्मित होते हैं। गलियो में तो वाहनो और साइकिलो के कारण लोगो का निकलना मुश्किल हो जाता है। जिससे आम नागरिकों परेशानी का सामना करना पड़ता है। वाहन अस्त-व्यस्थ खड़े रहने से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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