बहराइच में विलुप्‍त हो रहे पक्षियों को बचाने की वन विभाग की अनूठी पहल, छोटे-छोटे बच्‍चों ने बनाए घास के घोंसले”

“बहराइच में विलुप्‍त हो रहे पक्षियों को बचाने की वन विभाग की अनूठी पहल, छोटे-छोटे बच्‍चों ने बनाए घास के घोंसले”

बहराइच – चिड़ियों की विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण व भीषण गर्मी से उनके बचाव के लिए बहराइच के मोतीपुर रेंंज में मोगली विद्यालय के बच्चों ने एक अनूठी पहल की है। इस पहल पर बच्चों ने अब तक घास से बने 35 घोंसले पक्षियों के लिए तैयार कर लिए हैं। आमतौर पर चिड़ियों के लिए लकड़ी का बाक्स बनाया जाता है, जिसमें उनके खाने के लिए दाना रखने में काफी दिक्कत होती है। इसके अलावा देखा गया है कि लकड़ी से बने बाक्स या घर चिड़ियों को ज्यादा पसंद भी नहीं आते हैं। चिड़िया अक्सर पेड़ पर ही अपना घोंसला बनाती हैं और उसी में वह रहना पसंद भी करती हैं।

पक्षियों की सुविधा को देखते हुए बहराइच में कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के चिकित्सक डा. वीरेंद्र कुमार वर्मा ने एक अनूठी पहल शुरू की है। उन्होंने मोतीपुर रेंज में चल रहे मोगली विद्यालय के बच्चों को घास से घोंसले बनाने का हुनर सिखाया है। साथ ही उन्‍होंने बच्‍चों द्वारा घास से बने घोंसलों को आकर्षक डिजाइन के साथ तैयार भी करवाया है।

कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के चिकित्सक डा. वीरेंद्र ने बताया कि प्रभागीय वनाधिकारी आकाशदीप बधावन की सलाह पर हमने मोगली विद्यालय के बच्चों को घास के घोंसले बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पेड़ कट रहे हैं। उससे चिड़ियों को अपना आशियाना बनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे गांवों के आसपास निवास करने वाली चिड़िया विलुप्त होने की कगार पर हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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