
“रोहिंग्या व बांग्लादेशियों को हिंदू नामों से नई पहचान दिलाने वाले संदिग्धों की एटीएस को तलाश, पश्चिम बंगाल का है सिंडीकेट”
लखनऊ
पश्चिम बंगाल से लेकर यूपी के कई शहरों तक फैले इस गिरोह से जुड़े कई संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली में हनुमान जयंती की शोभायात्रा के दौरान पथराव व हिंसा की घटना के बाद उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित किया गया था। इसके बाद ही एटीएस ने एक बार फिर घुसपैठियों की पड़ताल तेज की है।
सूत्रों का कहना है कि इसी कड़ी में नेपाल सीमा पर बसे कई संदिग्धों के बारे में भी गहनता से छानबीन कराई जा रही है। एटीएस ने जून, 2021 में संतकबीरनगर से जब सबसे पहले रोहिंग्या अजीजुल हक को गिरफ्तार किया था, तब सामने आया था कि उसने यहां फर्जी दस्तावेजों के जरिए अजीजुल्लाह के नाम से दो पासपोर्ट, आधारकार्ड व अन्य प्रपत्र बनवा रखे थे।
उसने फर्जी राशनकार्ड, मार्कशीट व प्राथमिक पाठशाला के ट्रांसफर सार्टीफिकेट का इस्तेमाल कर ये भारतीय दस्तावेज बनवाये थे और उसके खातों में विभिन्न व्यक्तियों, फर्मों व विदेश से लाखों रुपये आए थे। बाद में रोहिंग्या अजीजुल के फर्जी दस्तावेज बनवाने में मददगार रहा
नगर पालिका खलीलाबाद का संविदाकर्मी अब्दुल मन्नान भी पकड़ा गया था
जिसके बाद कुछ अन्य युवकों की भी छानबीन तेज की गई थी और एटीएस ने कई शहरों में अपनी जांच का दायरा बढ़ाया था। घुसपैठियों के हवाला के जरिए ही म्यांमार व बांग्लादेश में अपनों को रकम भेजे जाने के तथ्य भी सामने आये थे। दिसंबर, 2021 में एटीएस ने पश्चिम बंगाल में शरण दिलाने के बाद घुसपैठियों को उत्तर प्रदेश, दिल्ली व अन्य राज्यों में भेजने वाले सिंडीकेट से जुड़े कई सक्रिय सदस्यों को भी पकड़ा था।
इस सिंडीकेट का हिस्सा रहे दिल्ली निवासी एजेंट कय्यूम से जुड़े कुछ युवकों की भी तलाश चल रही है। रोहिंग्या व बांग्लादेशियों को हिंदू नामों से विदेश भेजने वाले गिरोह के कई सदस्य अब भी जांच एजेंसी की पकड़ से दूर हैं, जिन तक पहुंचने के प्रयास तेज किये गये हैं।