बार एसोसिएशन एटा के चुनाव की उठापटक
मिश्रा ने पलटा एक रात में चुनाव
बकीलो की बल्ले -बल्ले
अधिवक्ता नलो में पड़े

कहाँवत है, राजनीति तो है विप्र की सीखे चाहे हम से कोई
राम राज्य में राम नरेश मिश्रा बरिष्ठ अधिवक्ता ने सावित कर दिया है, एक आखिरीरात चुनाव की कातिले रात्रि होती है, इसी रात्रि में खेल खेला जाता है, हर चीज मिलती है, मौहम्मद के शहर से अधिवक्ताओं को मुहैया करा कर चुनाव का गणित बदल दिया है,
कहा जाता है कि चुनाव कैसे भी हों लेकिन चुनने की कला को चुनाव माना जाता है, परन्तु बकील अपने आप में विद्वान माने जाते है। लेकिन जब इस खेमे में चुनाव होते है, तो बड़े-बड़े राजनीति के धुरंधर भी इस खेल में हाथ डालने सें डर जाते है, या फिर दूर खड़े तमाशा देखते रहते है।
अभी जनपद एटा के बार एसोसिएशन के चुनाव की सरगरमियाँ तेज हों चुकी है वही महीना भी अप्रेल हों गया है कि मौसमी गर्मी भी अपनी तलवार निकला कर हर किसी पर बार कर रहीं है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद की दौड़ में दो बड़े खिलाड़ी इस खेल में कूद चुके है। जिसमें एक रामनरेश मिश्रा बरिष्ठ अधिवक्ता एवं अशोक शिकरवार शामिल है। बाकी पदों पर भी लगभग यहीं समीकरण मौजूद है,
जिससे वकील मतदाता बड़े चाव सें इस समय दावते उड़ा रहें है. क्योंकि चुनाव का आखिरी दाँव मतदान के दिन तय हों जाता है। जो इस खेल सें बाहर है वो जातियाँ इस चुनाव को और रोचक बनाये हुए है। वही दूसरा कारण यह भी है कि पण्डित-ठाकुर के पेच में फस चुका है, बार एसोसिएशन का चुनाव…..
एक तरफ रामनरेश मिश्रा बरिष्ठ अधिवक्ता के लिए वकीलों में जोश भरा हुआ है तो वही अशोक शिकरवार के लिए सम्मान भी मौजूद है।कुछ वोट ऐसा भी मौजूद है जिसे चुनाव लड़ाने और हराने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उसे बस वोट करना है… बाक़ी तुम जानो.. तुम्हारा काम!!!!
जहाँ पण्डितों को ज्ञान का देवता माना जाता है, इसलिए पण्डितों के 215वोट है,ठाकुर तलवार से वार करने में रहा और पण्डितों से आशीर्वाद इसलिए 112 वोट है, अल्पसंख्यक इस्लामिक वोट 90है, दूध-मठा पीकर मैदान में अहीर वोट 160 है, लोहे के वने लोधो के वोट 180 है, भीम विचार धारा के वोटो की संख्या 85 है, बैश्य वोट 75 है,
शासकीय अधिवक्ता 55 वोट निर्णयक भूमिका में होगे, जिसमें 25 वोट भहाल हुए है, लेकिन वोटिंग सूचि में शामिल नही है,
Sc और obc फेक्टर के अंदर की बात मानी जाये तो वोट राम नरेश मिश्रा बरिष्ठ अधिवक्ता को आगे खड़ा करता दिखाई दे रहा है। वही सिकरवार को लड़ाने के पीछे के कारणों को देखे तो फिनिसिंग लाइन पर खड़ा कर दिया है.. बस ख़त्म करना बाकी रह गया है।
महासचिव के पद का गणित इस चुनाव का अहम् रोल बना रहा है। अगर ब्राह्मण वोटर आनंद प्रकाश की तरफ पलटा तब फिर राम नरेश मिश्रा बरिष्ठ अधिवक्ता को जीतना तय मान लिया जाये।ऐसा इसलिए नहीं कि बाक़ी सभी इस चुनाव को सिर्फ खड़े होकर देख भर रहें है। Sc वोटर महासचिव पद पर obc पद के लिए तो जा सकता है। लेकिन अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण प्रत्याशी ह्रदय से कोमल होना ही मतदान में वोट इन्ही शायद करें.. ऐसा भी हों सकता है।क्यूंकि Sc वोटर भी ब्राह्मण प्रत्याशी को मत करे प्रारम्भिक दौर सें ही बैचारिक मतभेद ठाकुर से रहे है। ये मतदान के दौरान बड़े सें बड़े चुनाव में देखने को मिलता भी है।
एंटी कम्बेंसी को रोकना बहुत मुश्किल काम है और यह काम अध्यक्ष पद पर लड़ रहें रामनरेश मिश्रा ही कर पाएंगे….
महासचिव पद के प्रत्याशी आनंद प्रकाश पूरे चुनाव में कहीं भी मौजूद नहीं थे लेकिन अब जिसे भी लड़ना है आंनद प्रकाश सें ही लड़ना होगा… क्यूंकि निचले स्तर पर युवाओं का वोट एक तरफ जा सकता है.. जिसे रोकना दो दिन में बहुत मुश्किलों भरा है।Sc obc एक सीट पर एक मत होकर वोट करना ही आंनद प्रकाश के लिए प्लस पॉइंट है।
वही अशोक सीकरवार एड.के पिछले बर्ष के चुनाव हारने के बाद भी मैदान में आना भी अशोक सीकरवार के लिए वरदान साबित होने जा रहा है. ऐसा हम नहीं कह रहें है… ऐसा बार एसोसिएशन के बुजुर्ग व विद्धान मतदाता बोल रहें है कि एक बार तो अशोक का अध्यक्ष पद के लिए जितना खर्च है… मिश्रा जी ने खर्चे के पैमाने तोड़ दिऐ है, सभी प्रत्याशियों ने जितना खर्च नही किया उतना अकेला मिश्रा जी ने … अब इन बातो के क्या मायने निकाले जा सकते है.. मतदाताओं का मूड है….
गणित के खेल में गणित कभी फेल नहीं हुआ है क्योंकि मतदाता उसी गणित का बड़ा अंक साबित होता है जब वो अपने मत का प्रयोग करता है। और यह खेला राम नरेश मिश्रा को प्लस में रखने वाला है
बार एसोसिएशन के सभी सदस्य मतदान जरूर करें क्योंकि मतदान आवश्यक है.।