वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और हिमचाल को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ की विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए शिमला पुलिस द्वारा विनोद दुआ को दंड प्रक्रिया संहिता की
जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा कि जांच अधिकारी (एचपी पुलिस) दुआ से कानून के अनुसार उनसे पूछताछ करने से 24 घंटे पूर्व दुआ को सूचना देंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार से जांच की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस मोहन एम शांतनगौदर की एक पीठ ने केंद्र, हिमाचल प्रदेश सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई में होगी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि विनोद दुआ को सुनवाई की अगली तारीख तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है, साथ ही उन्हें राजद्रोह के मामले में जांच में शामिल होने के लिए कहा। पीठ ने विनोद दुआ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह की ओर से की गई दलीलों के बावजूद दुआ के खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सिंह ने कहा कि एफआईआर सरकार के प्रति अनुचित विचारों को प्रसारित करने के लिए एक ‘उत्पीड़न’ है। दुआ के वकील विकास सिंह ने कहा कि शिकायत दर्ज करने वाले बीजेपी नेता सत्तारूढ़ पार्टी के हाथों की कठपुतली हैं। इस पर पीठ ने उन्हें टोका कि ऐसे विशेषणों का उपयोग न करें। इसकी आवश्यकता नहीं है।
बता दें कि शिमला पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अजय श्याम द्वारा विनोद दुआ के खिलाफ लगाए गए राजद्रोह के आरोप में उन्हें तलब किया था।
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