पुलिस द्वारा मीडिया कर्मियों को अर्धनग्न अवस्था में हवालात में बिठाकर उनके साथ ज्यादती किए जाने को कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता

खरी खरी
अशोक ‘निडर’ की कलम से,,,,,

सीधी जिले में पुलिस द्वारा मीडिया कर्मियों को अर्धनग्न अवस्था में हवालात में बिठाकर उनके साथ ज्यादती किए जाने को कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता इस कुकृत्य की जितनी निंदा की जाए कम है।
टी ,आई, से प्रश्न करने पर कहा गया कि कपड़े पहनकर आरोपी को आत्महत्या करने से रोकने के लिए ये निर्णय लिया गया।
वाह टी,आई,साहव वाह
क्या हवालात में सुरक्षा कर्मी नहीं होते।
दूसरी बात पाजामे के नाड़े या बैल्ट से अधिक साड़ी आदि से आसानी से फाँसी लगाई जा सकती है तो क्या पुलिस महिला आरोपियों को भी हवालात में नग्न अवस्था मे ही रखेगी।
पुलिस के कथनानुसार वे पत्रकार फर्जी हो सकते हैं तो उन पर 420 के तहत कार्यवाही की जा सकती थी लेकिन किसी की अस्मिता से खिलबाड़ करने से तो यही लगता है कि पुलिस सत्यमेव जयते या देशभक्ति- जनसेवा के नारे को भुलाकर डंडाभक्ति-धनसेवा को ही कर्तव्य मानती है।
क्या सूबे के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में तुरंत संज्ञान लेकर सच की आवाज को उजागर करने बाले पत्रकारों को प्रताड़ित करने बाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही करके पत्रकारों का सम्मान बापस दिलाने का सार्थक प्रयास करेंगे।
अशोक ‘निडर’
स्वतंत्र पत्रकार

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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