लूटी गई राफइलों के लिए पुलिस खोज रही मालखाने

लूटी गई राफइलों के लिए पुलिस खोज रही मालखाने

एटा – पिछले तीन वर्षों से पुलिस के अधिकारी थाना राइफल गायब होने की जांच कर रहे है। पुलिस को राइफल संबंधी सुराग नहीं मिल सके। जबकि राइफल 25 वर्ष पहले जैथरा में पड़ी डकैती के दौरान कांस्टेबल की हत्या कर लूट ली थी। इस मामले में मुकदमा तो दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस के छह विवेचक इस मामले का खुलासा नहीं कर सके थे। एक वर्ष से अधिक समय तक जांच के बाद इस मामले में एफआर लगा दी गई थी।

जैथरा में 12 जनवरी 1997 में राजेश गुप्ता पुत्र छोटेलाल गुप्ता के यहां डकैती पड़ी थी। डकैतों की संख्या 10 से 12 के बीच रही होगी। डकैती की आवाज थाना पुलिस भी पहुंच गई थी। बदमाशों को यह आहट हो गई कि पुलिस ने घेर लिया है ऐसे में बदमाशों और पुलिस के बीच फायरिंग शुरू हो गई थी। बदमाशों की ओर से चलाई गई गोलियों में थाना जैथरा में तैनात रहे कांस्टेबल गजराज सिंह और व्यापारी सुरेश की हत्या कर दी गई थी। होमगार्ड सत्यप्रकाश घायल हो गए थे। बदमाशों ने इस घटना में डकैती के अलावा पुलिस की दो राइफलें लूट ली थी। इस मामले की रिपोर्ट मृतक सुरेश के भाई राजेश गुप्ता ने मुकदमा दर्ज कराया थी। घटना का खुलासा करने के लिए पुलिस टीमें भी लगाई है। इस मामले की विवेचना थाना पर तैनात रहे दरोगा पीवी सिंह, राजकुमार, आईडी शर्मा, आरएस द्धिवेदी सहित छह पुलिस अधिकारियों को दी गई। इसमें से किसी भी विवेचक ने घटना का खुलासा नहीं किया। पांच नंबर 1998 इस डकैती और हत्या के मामले में पुलिस की ओर से एफआर लगा दी गई। जिस डकैती में सिपाही सहित दो लोगों की हत्या हुई हो और सरकारी राइफलें लूटी गई हो उस मामले में एफआर देख अब के अधिकारी हैरान है। आखिर इस मामले पुलिस की ओर से कोई रुचि नहीं दिखाई दी। यह राइफलें आज तक मिली ही नहीं है। थाना में भी वहीं राइफलें कम चली आ रही है। राइफल कम होने के मामले में थाना जैथरा में दो दिन पहले मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस मामले की रिपोर्ट पुलिस कार्यालय के लिपिकों सहित तीन लोगों पर दर्ज कराया गया है। जबकि जांच करने वाले अधिकारियों ने डकैती वाली घटना पर ध्यान ही नहीं दिया।

डकैत मौके पर भूल गए थे लाइसेंसी बंदूक

जो बदमाश जैथरा में डकैती डालने के लिए आए थे। पुलिस मुठभेड के समय अपनी एक लाइसेंसी बंदूक भूल गए। यह बंदूक आज भी जमा बताई जा रही है। इस लाइसेंसी बंदूक पर उसका नंबर भी दर्ज है। अगर पुलिस की ओर से इस मामले में बंदूक के सहारे जांच की गई होती तो शायद सफलता मिल सकती थी।

वर्ष 1997 में जैथरा में पड़ी डकैती में कांस्टेबल की हत्या कर एवं होमगार्ड को घायल कर डकैत दो सरकारी राइफल लूट ले गए थे। इस मामले की थाना पर रिपोर्ट दर्ज है। यह राइफलें अभी मिल नहीं सकी है।

सुधीर राघव, थानाध्यक्ष जैथरा

इस संबंध में जानकारी मिली है कि राइफल डकैती में चली गई थी। इस मामले की विधिक राय मांगी जा रही है कि इसमें क्या हो सकता है। अगर इस मामले की विवेचना संभव हुई तो कराई जाएगी।

धनजय कुशवाह, एएसपी एटा

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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