पेपर लीक मामले में रिपोर्टिंग करने वाले तीनो पत्रकार गिरफ्तार हो चुके हैं।

लगभग वर्ष भर पहले मिड डे मील की खामियों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार महोदय जेल में है।
और एक अन्य पत्रकार जिन्होंने सरकारी अनाज को पानी से सड़ाकर दारु कंपनियों को बेंचने वाले अधिकारियों का पर्दाफाश किया था,को जान से मारने तक की साजिश की गई थी। अंत मे उस पत्रकार को भी एक षड्यंत्र के तहत झूठी एफआईआर में जेल भेजा दिया गया था।
ऐसे हालातो में कौन पत्रकार/ईमानदार अधिकारी अपनी जान जोखिम में डालकर कर सच उजागर करने की हिम्मत दिखाएगा?
और सच के लिए लड़े भी तो किसके लिए?? उस मूर्ख अधकचरी, स्वार्थी जनता के लिए जो आज भी 70 साल का रोना रोकर अपना वर्तमान बर्बाद करने पर तुली है? पांच किलो राशन जिसके लिये सबकुछ हो वह गुलामी करने लायक ही है
हम एक नए “सर्विलांस स्टेट” की और बढ़ रहे हैं,जहाँ सारी शक्ति राज्य के हांथो में होगी। आने वाले समय मे राज्य तय करेगा कि तुमको क्या खाना है,क्या पीना है,कहां जाना है और क्या खरीदना है।
हिटलर भी मासूम लगेगा जिसदिन आधुनिक तानाशाहों के नए सर्विलांस नियंत्रण को अपनी आंखों से फलित होते देखोगे। नींव बहुत पहले रख दी गई थी,धीरे धीरे लक्ष्य की ओर सरकारें बढ़ रहीं है।हैं।