
तपते दिन, तेजी से गरम होती रातें फसलों पर ढा रहीं सितम
एटा – पिछले कई वर्षो की अपेक्षा इस बार मार्च में ही मई जून की भांति तपते दिन एवं गरम रातें होने से खेतों की नमी खत्म होने से गेहूं की फसल पकने के बजाय सूख रही है। इससे उत्पादन में काफी गिरावट आने की संभावना बनी हुई है। जबकि इस वर्ष जनपद में पिछले वर्ष से अधिक गेहूं का उत्पादन किया गया है। गर्मी अधिक होने से किसान परेशान हैं।
कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इस बार जनपद में एक लाख 36 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं का उत्पादन किया गया है। जबकि पिछले वर्ष एक लाख तीस हजार हेक्टेयर भूमि पर ही गेहूं का उत्पादन किया गया था। किसानों ने इस बार उत्पादन यह सोचकर अधिक किया कि उन्हें अच्छा उत्पादन मिलेगा। इससे उनकी आय बढ़ेगी। मगर इस बार समस से पहले ही तेज धूप एवं गर्मी के कारण खेतों की नमी खत्म होने से गेहूं की फसल पकने की बजाय सूख गई है। इससे गेहूं उत्पादन में भारी गिरवाट होने की संभावना बनी हुई है।
जनपद के अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की फसल मार्च माह में ही सूख चुकी है। इसे अब काटना ही बाकी रह गया है। जबकि फसल करने का स्टैंडर्ड समय अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह से शुरू होता है। मगर इस बार समय से पहले ही फसल सूख जाने से किसान चिंतित हैं। किसानों को यह बात भली प्रकार मालूम है कि इस बार गेहूं की बाल में दाना मोटा ही नहीं हो पाया। उससे पहले ही वह सूख गई। ऐसा होने से गेहूं का दाना कम मोटा होगा। इससे उत्पादन कम होगा। वहीं कुछ क्षेत्रों के किसान गेहूं एवं जौ की फसल में नमी लाने के लिए पुन: सिंचाई कर रहे हैं। उनका मानना है कि फसल की सिंचाई करने से उनमें ग्रोथ हो सकती है। क्योकि उनकी फसल अभी भी पूरी तरह सूखने की कगार पर नहीं है।
जनपद के अंदर कुछ ही क्षेत्रों में गेहूं की फसल सूखी है। बाकी फसल सही समय पर ही पक रही है। उत्पादन में पांच से सात प्रतिशत ही कमी आएगी। कोई अधिक कमी आने की संभावना नहीं है।
-एमपी सिंह, डीडीए, एटा
एक अप्रैल से शुरू होगी 72 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद
इस बार गेहूं का उत्पादन बड़े पैमाने पर होने के बाद भी शासन-प्रशासन ने सरकारी क्रय केंद्रों की संख्या में कमी कर दी है। पिछले वर्ष जनपद के 89 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद की गई थी। मगर इस बार कुल 72 क्रय केंद्र ही गेहूं बिक्री के लिए बनाए गए हैं। इस बार जनपद में 17 क्रय केंद्र कम बनाए जाने से किसानों को गेहूं बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खाद्य विपणन अधिकारी नंदकिशोर ने बताया कि क्रय केंद्र बनाने के लिए शासन को पहली सूची भेजी गई है। दूसरी सूची में और क्रय केंद्र बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होने यह भी बताया कि इस बार क्रय केंद्रों पर किसानों का गेहूं 2015 रुपये प्रति क्वंटल के हिसाब से खरीदा जाएगा।
मार्च में बढ़ गई एसी की डिमांड
एटा। मार्च में मई-जून जैसी धूप और तपन के चलते लोग सर्वाधिक वातानुकूलित उपकरणों की खरीदारी कर रहे हैं। इलेक्ट्रिानिक दुकानों एवं शोरूमों पर कूलर-पंखों से ज्यादा लोग एसी की डिमांड कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि उपकरण बेचने वाली कंपनियां एवं विक्रेता ग्राहकों को कई आकर्षक स्कीम दे रहे हैं। इसके साथ ही इस बार कोरोना संक्रमण का खतरा बेहद कम बना हुआ है। इसके चलते वातानुकूलित उपकरणों का कारोबार तेजी से दौड़ रहा है।
इस बार इलेक्ट्रॉनिक शोरूमों पर एसी, कूलर और फ्रिज की पिछले दो वर्षों की अपेक्षा अधिक डिमांड बनी हुई है। इसका मुख्य कारण है कि इस बार होली के साथ ही मार्च माह में मई-जून जैसी गर्मी पड़ना शुरू हो गई। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों की ओर से मिलने वाले आकर्षक ऑफर एवं विक्रेताओं की ओर से आसान किस्त की सुविधा मिलने से लोग कूलर से ज्यदा एसी की खरीदारी कर रहे हैं।
एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शोरूम संचालक ने बताया के होली से तापमान में वृद्धि होने के साथ कोरोना संक्रमण न होने से लोग कूलर से अधिक एसी की खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर में होली से अब तक एक हजार से अधिक एसी बिक एवं बुक हो चुके हैं। मगर एसी इंटोलेसशन करने में कंपनियों के कारीगर अधिक समय लगा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि एसी की बिक्री अधिक होने से इंस्टालेशन वेटिग में चल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कूलर की बिक्री में भी पिछले वर्षो से अधिक इजाफा हुआ है।