कर्मयोगी कलेक्टर: मां का अंतिम संस्कार कर तुरंत लौटे काम पर
अचानक देर रात तीन बजे कलेक्टर सीआर खरसाण को मां के मरने की खबर मिलती है। खरसाण साहब तुरंत गाड़ी लेकर निकल पड़ते हैं पांच सौ किलोमीटर दूर अपने गांव। घर पहुंचते हैं। 15 अप्रैल को शाम तीन बजे तक अंतिम संस्कार करते हैं। फिर वापस पांच सौ किमी दूर ड्यूटी वाले जिले रवाना हो जाते हैं। 16 अप्रैल को फिर से काम पर आ जाते हैं।
मां के मरने की असहनीय पीड़ा के बीच एक हजार किलोमीटर की थकान भरी यात्रा। फिर भी एक दिन की छुट्टी न लेना इस अफसर को कर्मयोगी बनाता है।
कार्य के प्रति यह समर्पण दिखाने वाले सीआर खरसाण इस समय गुजरात के वलसाड जिले के कलेक्टर हैं। 2006 बैच के आईएएस हैं।
आज इनके बारे में मुझे खबर हुई। इस समर्पण को देखकर मुझसे रहा नहीं गया। मैने सीआर खरसाण साहब का मोबाइल नंबर हासिल किया। फोन कर उन्हें सैल्यूट किया। मैने थोड़ी और डिटेल हासिल करने के छुपे मकसद के साथ कहा- आप 500 किमी दूर घर गए थे। थके रहे होंगे, कम से एक दिन का ब्रेक भी ले सकते थे? जिस पर खरसाण साहब ने मुझसे कहा, मेरा वलसाड जिला बांबे के नजदीक है। बांबे में आप देख ही रहे हैं कितना कोरोना का खतरा है, लेकिन मेरे जिले मे अब तक एक भी केस नहीं सामने आया है। यह गुजरात के 23 उन जिलों में हैं, जहां कोरोना अब तक फटक नहीं सका है। क्योंकि चारों तरफ की सीमाएं सील हैं। एक दिन की भी ढील होने पर सारे कदम बेकार जा सकते थे। इस नाते मेरा आना बहुत जरूरी थी। मैने रिश्तेदारों को कह दिया था कि सब घरो से रहकर माता जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। लॉकडाउन में किसी को आने की जरूरत नहीं है। क्योंकि मैं तुरंत वापस चला आऊंगा।
रिश्तेदारों को पहले से ही मना कर दिया कि सब घर में रहें, किसी को नहीं आना है।