पत्रकारों की जांच होनी चाहिए

पत्रकारों की जांच होनी चाहिए
जर्नलिस्ट एंड सोशल वेलफेयर एसोसिएशन पॉवर ऑफ मीडिया एंड यूनिटी के कानपुर जिला अध्यक्ष सैफ खान ने कहा चौथे स्तम्भ अर्थात पत्रकारिता को उपेक्षा का दंश झेलना पड़ रहा है। पत्रकार बनाने से पहले क्यों नही होती जांच–? अपराधी, माफियाओं और कालाबाजारी का काम करने वालों को तो नही बना दिया जा रहा है पत्रकार! तृतीय विधायिका और चतुर्थ पत्रकारिता। अर्थात चतुर्थ स्तंभ के तौर पर पत्रकारिता का स्थान आता है। पत्रकारिता को यह स्थान इसलिए दिया गया है क्योंकि समाज में दबे, कुचले, मजलूम, महिलाओ, बच्चो के साथ हो रहे गलत व्यवहार, जुर्म, हत्या, अत्याचार, शोषण जैसे मुददो को वह अपनी कलम और कैमरे के माध्यम से उच्चाधिकारियो, नेताओं और समाज के सामने एक आइने के तौर पर रखने का काम करते है इसीलिए पत्रकारिता को एक महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है। और चतुर्थ स्तंभ भी कहा जाता है।वही आज के समय में पत्रकारिता की चकाचौंध देखकर बहुत से लोग इस क्षेत्र में आने केे लिए उत्साहित है लेकिन इस क्षेत्र में आने के भी कुछ नियम कायदे होते है, आपका शिक्षित होना बेहद जरूरी होता है क्योंकि अगर आप शिक्षित नही है तो आप खबर को विश्लेषण के साथ लिख नही पायेंगे,आपकी पृष्टभूमि क्या है, कहीं आप गुंडा माफिया तो नही, कहीं आप चोरी छिपे अवैध धंधा तो नही कर रहें, कहीं आप कालाबाजारी तो नही कर रहें है, कहीं आप अन्य अपराधों में शामिल तो नहीं है, और सिर्फ आड़ के लिए पत्रकारिता का सहारा ले रहे है।अगर ऐसा है तो निश्चित तौर पर ऐसे लोग समाज के लिए तो कलंक है ही साथ ही साथ पत्रकारिता जैसे पवित्र पारदर्शिता पेशे को गंदा कर रहें है

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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