रहस्य कि आखिर आशीष यादव कैसे??

अभी उत्तर प्रदेश में राजनैतिक हलचल बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहीं है वही बड़े उलट फेर भी देखने को मिल रहें है। विधानसभा चुनाव 2022 के हार-जीत के मंथन के बाद प्रदेश में बीजेपी सरकार अपनी दूसरी पारी की शपथ लेने जा रहीं है। जनता नें बीजेपी को उम्मीद से भी ज्यादा समर्थन देकर जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है।
इसी जिम्मेदारी के साथ बीजेपी नें अपने सपनो में एक प्रयास और करने का कदम उठाया है।प्रदेश के 40 साल के राजनैतिक उतार- चढ़ाव को देखे तो बसपा और सपा नें सत्ता पर कदम साथ ही रखे थे।और दोनों पार्टियों नें बारी-बारी से प्रदेश की सत्ता पर शासन भी किया है।
लेकिन ऐसा क्या हुआ है कि समाजवादी पार्टी के बड़े नेता और मुलायम सिंह यादव के सबसे प्रिय मित्र रमेश यादव (सभापति)के बेटे आशीष यादव नें बीजेपी का दामन थाम लिया है और अपने पिता द्वारा एटा जनपद में राजनीति की बिछाई बिसात की कमान एक बार फिर से अपने हाथों में लें ली है।
मुलायम सिंह यादव और रमेश यादव उस समय के मित्र माने जाते है जब दोनों ही राजनीति से दूर का वास्ता रखते थे। लेकिन समय नें करवट ली और दोनों ही राजनीति में एक दूसरे के पूरक हों गए थे।
लोगों का यहाँ तक भी कहना है कि जब एक बार विधानसभा से मुलायम सिंह यादव को कुछ दिनों के लिए निष्कासित कर दिया गया था तब एक मात्र विधायक थे जिन्होंने कहा था कि आप नेता जी सदन में जायेगे तो हम जायेगे और अगर आप नहीं तो हम नहीं… यहीं शब्द मुलायम सिंह यादव के लिए यादगार हुए और रमेश यादव मुलायम सिंह यादव (नेता जी) के दिल में बस गए ..।2012 के प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी कहा जाता रहा कि आशीष यादव एटा सदर सीट हार जायेगे लेकिन एक मात्र नेता जी नें सभी के विरोध के बाबजूद आशीष यादव को एटा सदर पर टिकट देकर सन्देश दिया था कि नेता जी के लिए रमेश यादव क्या है…. उस समय मुलायम सिंह यादव (नेता जी)नें आशीष यादव को टिकट देते हुए पार्टी पदाधिकारियों से कहा था कि एक सीट हार जायेगे तो क्या हुआ… एटा सदर पर तो सिर्फ आशीष यादव ही लड़ेंगे…। यह अंदाज था मुलायम सिंह यादव का अपने नेताओं के लिए…..
लेकिन समय बदला और 2014 के लोकसभा चुनाव नें देश ही नहीं भारत के प्रत्येक राज्य के मतदाताओं की सोच पर बीजेपी नें अपना एजेंडा फिट करना शुरू कर दिया था और उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पूरा ध्यान लगा दिया था। सबका साथ का साथ लेकर प्रदेश में 2017 ही नहीं 2022 की शपथ भी ली जा रहीं है।
लेकिन हम अपने उसी मुख्य मुद्दे पर आ रहें है कि आखिर फिर एटा सदर से MLC पद पर आशीष यादव ही क्यूँ…….. ऐसा इसलिए हों रहा है क्योंकि मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते है कि रमेश यादव का बेटा बिना राजनीति के रहें वही दूसरा मुद्दा था कि प्रदेश MLC सीट सबसे बड़ी सीट एटा-मथुरा-मैनपुरी ही है। जिस सीट को कभी एटा के कद्दावर नेता रहें चौधरी नबाब सिंह यादव नें ही अपनी सिफारिश पर तीन जिलों की एक MLC सीट बनवाई थीं। जिस पर रमेश यादव MLC रहें अब उनके बेटे को मिली है।
आप सभी का एक सबाल बाक़ी रह गया है कि आखिर आशीष यादव ‘आशु, ही क्यूँ…।मुलायम सिंह यादव (नेता जी) का इतना भी समय ख़राब नहीं आया है कि आरएसएस और बीजेपी किसी आदेश को ना कह दें। यहीं कारण था कि यादव सीट पर समाजवादी पार्टी नें एक ठाकुर प्रत्याशी को लड़ाया और बीजेपी से पिटवा कर भगा भी दिया। …… अब आप समझ गए होंगे कि मुलायम सिंह यादव है तो रमेश यादव भी है ।