अधिवक्ताओं के हित के लिए संघर्ष जारी रहेगा:-धर्मेन्द्र सिंह
–न्याय व्यवस्था में शामिल

अधिवक्ताओं के हित के लिए संघर्ष जारी रहेगा:-धर्मेन्द्र सिंह
–न्याय व्यवस्था में शामिल
जुम्मेदारों की जबाबदेही होनी चाहिए:-पंकज कुमार एडवोकेट।
एटा,
कलेक्ट्रेट बार एटा में इलाहाबाद बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह के आगमन पर अधिवक्ता हितों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन हुआ ।कार्यक्रम की अध्यक्षता कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन एटा के अध्यक्ष श्री सत्येंद्र सिंह चौहान ने की, और संचालन पंकज उपाध्याय एडवोकेट ने किया ।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में पधारे इलाहाबाद बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष श्री धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि अधिवक्ताओं के हित के लिए उत्तर प्रदेश के भ्रमण पर हूं ।जगह-जगह कार्यक्रमों के माध्यम से अधिवक्ताओं की समस्याओं को सुनने का मौका मिल रहा है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हम एटा के अधिवक्ताओं की सारी समस्याओं को उच्च स्तर पर रखेंगे, चाहे वह जिला न्यायाधीश से लेकर एटा बार के अधिवक्ताओं के बीच संघर्ष का प्रकरण हो या फिर अधिवक्ताओं का कॉमन वेलफेयर हो, सामाजिक अन्याय में भी कानूनी कलम से हम अधिवक्ताओं को आगे आना होगा।
इस अवसर पर प्रथम वक्ता के रूप में कु0 सत्येंद्र सिंह एडवोकेट ने कहा कि जिला न्यायाधीश और एटा बार आंदोलन के बारे में न्यायाधीश की हठधर्मिता और गलत निर्णय तथा ओथकमिश्नर ओं का बिना बार की इच्छा से बिना पूछे ही चेहरा देखकर उनकी नियुक्ति करना उचित नहीं है। इसलिए मैं उपाध्यक्ष महोदय से जो आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भी हैं ।इस ओर ध्यान के लिए चाहूंगा ,कि वह इस प्रकरण का भी संज्ञान लें ,एडवोकेट अशोक सिकरवार ने भी अधिवक्ता हितों की बात कही, तथा अधिवक्ता उपेंद्र पाल सिंह एडवोकेट पूर्व अध्यक्ष कलेक्टर बार ने कहा कि ग्रेजुएट अधिवक्ता झोपड़ी में बैठकर मजदूरी के तरीके से कार्य कर रहा है। लोकतंत्र के लिए यह शर्म की बात है ।सरकार को अधिवक्ताओं के प्रति सरकार को गंभीर होना चाहिए, और उनको सुविधाएं दी जानी चाहिए ।अन्यथा अधिवक्ता गण आने वाले समय में सरकार के प्रति भी आंदोलित हो सकते हैं और न्याय व्यवस्था में हम अधिवक्तागणों और न्यायिक अधिकारियों की पूरी जवाबदेही होनी चाहिए। जिम्मेदार लोगों की जब तक न्याय व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक हम उपेक्षा के शिकार रहेंगे। सिविल प्रकरणों में भी उन्होंने कहा कि जब सिविल प्रकरण को 24 से 72 घंटे के अंदर स्टे होना चाहिए ,उसे 6 माह तक लंबित नहीं रखना चाहिए ।इससे पीड़ित व्यक्ति का मनोबल टूटता है। बार के महासचिव राकेश यादव ने कहा कि एटा के अधिवक्ताओं को समस्याओं से गुजर रहे है इससे निजात दिलाई जाए, और प्रत्येक कोर्ट में सीसी कैमरे लगवाए जाएं ,जिससे यह पता हो सके, कि अधिवक्ता या न्याय व्यवस्था का संचालन करने वाले दोनों की जवाबदेही होनी चाहिए। अंत में अध्यक्षता कर रहे श्री सत्येंद्र सिंह चौहान एडवोकेट ने कहा कि हम अधिवक्ताओं को अपने क्षेत्राधिकार में रहकर कार्य करना चाहिए अधिवक्ताओं के हित के लिए कम से कम साल में 1-2 वार्षिक सम्मेलन होने चाहिए, और उन्होंने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्वालिफाइड और ईमानदार जजेज आने चाहिए ।जिससे कि वादों को पेंडिंग रखा जा रहा है।उनको जल्द से जल्द न्याय व्यवस्था पर उचित निर्णय लेकर उनका समाधान किया जाए। लंबित प्रकरणों में न्यायिक अधिकारियों की जवाबदेही होनी चाहिए। इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्तागणों में राम नरेश मिश्रा ,आरती एडवोकेट, गुरदीप सिंह टाइटलर, प्रशांत ,रमेश बाबू यादव, देवेंद्र कुमार लोधी, दिनेश यादव ,शैलेंद्र कुमार एडवोकेट, कृष्ण पाल सिंह, कौशल किशोर, कु0 सत्येंद्र सिंह ,उदय राज सिंह सोलंकी ,अनिल भारद्वाज ,श्याम गुप्ता, अर्जुन यादव ,अशोक सिकरवार, विनोद यादव, राजीव चौहान, सियाराम सिंह, ऋषि कुमार ,अवनीश कुमार ,देशराज सिंह सुमन, जगन वाष्णेय, राधारमण वाष्णेय, उपेंद्र पाल सिंह, श्याम गुप्ता, धर्मेंद्र कुमार सिंह,आदिअधिवक्तागण मौजूद रहे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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