डीएम के साफ सुथरे निर्देशो की आड़ में आशा चयन में कर लिया बड़ा खेल..!
*30 नई आशाओं की करा दी ट्रेनिग 2 साल से ट्रेनिग की आस में मुफ्त सेवाएं दे रही आशाओं नही लिया
*डीसीपीएम एवं मेडिकल अफसरों की मिलीभगत से
नई आशाओं की गई भर्ती

एटा। आशा योजना के तहत आशा बहू कोई फिक्स वेतन नही है परन्तु इनके चयन के नाम पर स्वास्थ विभाग में खूब धन उगाही होती रही है।चुनावो से ऐन पहले जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों पर नई आशाओं की नियुक्ति कर ली गई है। इसके पीछे जिलाधिकारी एटा के निर्देशों को हवाला दिया जा रहा है। इस मामले में जब पता किया गया तो बताया गया है अक्टूबर माह में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने कहा था योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने के लिये आशाओं की दक्षता को बढ़ाया जाए यदि अनट्रेंड है तो उन्हें प्रशिक्षित किया जाए यदि कम है तो नये प्रस्ताव लेकर यह संख्या बढ़ा ली जाए।
इन साफ सुथरे निर्देशो को हथियार बना कर डीसीपीएम/मेडिकल अफसरों ने नई नियक्तियाँ कर ली और उन्हें प्राथमिकता से पिछले माह 8 दिन का प्रशिक्षण देकर ट्रेंड भी कर दिया गया। उधर दो वर्ष से ट्रेनिग की आस में स्वस्थ योजनाओं का मुफ्त काम कर रही आशाओं को दूर रखा। स्वास्थ केंद्रों पर इस योजनाओं को देख रहे कर्मियों ने बताया है प्रत्येक स्वास्थ केंद्र से अनट्रेंड आशाओं की सूची विभागीय पत्रको के साथ डीसीपीएम को उपलब्ध कराई जा चुकी है शीतलपुर से 12 आशाओं के ट्रेनिग हेतु सूचना 18/6/2019 को सीएमओ को प्रेषित की जिस पर एसीएमओ आरसीएच/डीसीपीएम को स्पष्ट निर्देशित किया परन्तु इन विभागीय सूचनाओं और उच्चाधिकारियों के आदेश को ठेंगा दिखा कर डीसीपीएम ने नई नियक्तियो पर ट्रेनिग की कार्यवाही की। नये चयन पर ट्रेनिग की जल्दबाजी के पीछे बताया गया है आशाओं को लंबे चौड़े शब्जबाग दिखा कर बसूली की गई है जो स्वास्थ्य केंद्रों पर चर्चित अटकलों के अनुसार 40 हजार से 50 हजार तक है।
गौरतलब है एटा में मतदान के अगले दिन नई आशाओं की 8 दिवसीय ट्रेनिग सीएचसी बागवाला पर कराई गई जिसमें समीपवर्ती ब्लॉक सहित अवागढ़ ब्लॉक की नई आशाओं ने प्रतिभाग किया। एटा के लालगढ़ी में प्रशिक्षण केंद्र होने के बावजूद दूसरी जगह यह प्रशिक्षण क्यो कराया गया.. ? यह समझने की बात है मजेदार तथ्य यह है जब प्रशिक्षणार्थी आशाओं से पूछा कि कितने बजे तक ट्रेनिग चलती है तो सभी ने दो टूक कहा 5 बजे तक उसके बाद सभी घर चले जाते हैं। आशाओं के यह खुलेआम जबाब डीसीपीएम यूनिट की धांधलियों की एक और चुगली कर गया कि बागवाला की ट्रेनिग आवासीय नही हुई। जबकि आवासीय ट्रेनिग का बजट आता है साफ जाहिर है ट्रेनिग के बजट में सभी सम्बंधित अफसर गोलमाल करते रहे हैं। रात्रि में ठहरने 3 वक्त के भोजन नाश्ते का अच्छा खासा बजट आता है जो प्रति ट्रेनीज 300 रुपए सिर्फ खाने के नाम पर होता है।
बैग स्टेशनरी आदि सहित यात्रा भत्ता का अलग से प्रावधान है। मजे की बात यह है जब एसीएमओ आरसीएच से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने दो टूक कहा हमे पता नही डीसीपीएम को पता होगा। उच्चाधिकारी जो खुद नोडल अफसर है उन्हें नई नियक्ति और उसकी ट्रेनिग को मुकम्मल जानकारी न होना आश्चर्य में डालता है। डीएम अंकित कुमार अग्रवाल के निर्देशों के असल मन्तव्य को समझ कर इस दिशा में कदम बढ़ाए होते तो 2 वर्ष से मुफ्त सेवाएं दे रही चयनित आशाओं का भी प्रशिक्षण हो जाता। इस मामले में सीएमओ एटा से कॉल करके बात करने की कोशिश की तो कॉल नही उठी जब मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में जाकर सम्पर्क करना चाहा तो वहाँ सन्नाटा पसरा था आफिस में वे नही मिले। अब देखना है डीएम अंकित कुमार अग्रवाल अपने निर्देशो का मतलब बदलने बाले इस भृष्ट अफसरों के खिलाफ क्या कार्यवाही करते है।