
होली में चढ़ेगा टेसू का रंग, पंसद बना खास रंग – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – ब्रज में होली के विविध रंग हैं। लोककथाएं हैं, मान्यताएं हैं तो उत्सव और उल्लास भी है। यहां रंगभरनी एकादशी को अबीर-गुलाल उड़ता है, गली-मुहल्ला गुलाल से भर उठता है तो बाजार की होली में टेसू का रंग घुलता है। टेसू के रंग के बिना बाजार की होली पूरी नहीं होती है। इसलिए शहर का हर बाजार टेसू के रंग से सराबोर हो जाता है। होली नजदीक आते ही टेसू से बाजार भी सजने लगे हैं।हर शहर की होली की अपनी अलग खासियत है। रंगभरनी एकादशी के दिन ठाकुरजी के साथ होली खेलने की परंपरा है। खासकर पुराने शहर में इसका खूब रंग देखने को मिलता है। इसी दिन लठामार होली भी होती है। वहीं, होली से एक दिन पूर्व बाजार की होली होती है। सुबह बाजार खुलता है। 10 बजे के बाद से धीरे-धीरे शुरूर चढ़ना शुरू हो जाता है। दोपहर 12 बजे तक शहर का हर बाजार टेसू के पीले रंग से रंग उठता है। दुकानदार, कारोबारी और कर्मचारी सब मिलकर होली खेलते हैं। आपसी सौहार्द का भी रंग इसमें देखने को मिलता है। मालिक और कर्मचारी एक साथ मिलकर होली खेलते हैं। बाजार में जाने वाले ग्राहक भी टेसू के रंग से नहा उठते हैं। यहां तक राहगीरों को भी नहीं छाेड़ा जाता है। शहर के कनवरीगंज, छिपैटी, बारहद्वारी, महावीरगंज, फूल चौक, रेलवे रोड, सासनीगेट, दुबे पड़ाव, अचलताल आदि बाजारों में जमकर रंग चलता है। शाम तक सभी टेसू के रंग से रंग उठते हैं।