सेवानिवृत्त डॉ. देव कुलश्रेष्ठ की गोसेवा खास किस्म की

सेवानिवृत्त डॉ. देव कुलश्रेष्ठ की गोसेवा खास किस्म की

एटा। शहर के सिविल लाइंस निवासी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सेवानिवृत्त डॉ. देव कुलश्रेष्ठ की गोसेवा खास किस्म की है। अपने घर में उन्होंने कई गाय और बछड़े पाल रखे हैं। खास बात है कि हर गाय और बछड़े का उन्होंने बच्चों की तरह नामकरण किया है जो उनके मुंह से अपना नाम सुन उनके पास पहुंच जाते हैं।

शहर में लोग अपने घर की सुरक्षा के लिए कुत्ते पालते हैं और घर के मुख्य दरवाजे पर बांध देते हैं, लेकिन सिविल लाइंस निवासी डॉ. देव कुलश्रेष्ठ गाय, बछड़ों को पालते हैं। घर के मुख्य दरवाजे पर ऋषक्ष (सांड़) को बांधते हैं। घर में कोई भी आए तो वह अपनी आवाज से घर के लोगों को सचेत कर देता है। उन्होंने बताया कि उनके पिता महावीर प्रसाद कुलश्रेष्ठ भी गाय पालते थे। जिसे देखकर मुझे प्रेरणा मिली। वहीं कक्षा 11वीं में भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप का पाठ पढ़ा, जिसमें गोसेवा का अध्ययन किया था।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में जयपुर रहकर नौकरी की। 2008 में सेवानिवृत्त होने के बाद यहां आ गए और गोपालन कर उनकी सेवा शुरू कर दी। हर गाय को नाम देकर उसको प्रशिक्षण भी दिया। डॉ. देव ने बताया कि पिछले साल करीब 15 गाय की सेवा किया करते थे, लेकिन चोट लगने की वजह से अब ज्यादा काम नहीं कर पाते हैं। वर्तमान में दो गाय दो ऋषभ व एक बछड़ा है। गाय के नाम रामा व लैली है, ऋषभ के नाम गोकरन व कान्हा तथा वहीं बछड़े का नाम जयरथ है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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