यतींद्र मिश्र की किताब बताती है कि लता मंगेशकर के आदर्श पुरूष विनायक दामोदर सावरकर थे।

प्रसिद्ध लोकशायर सांभा जी भगत बताते हैं कि उनके लोग लता जी के पास गए थे। वे चाहते थे कि लता जी आंबेडकर पर केंद्रित गानों को अपना स्वर दें। लता जी ने मना कर दिया, जबकि सांभा जी ने लोग उन्हें पर्याप्त फीस देने को तैयार थे।
लता जी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की शुरूआत होने पर टि्विट कर कहा था कि “कई राजाओं का, कई पीढ़ियों का और समस्त विश्व के राम भक्तों का सदियों से अधूरा सपना आज साकार हो रहा है”।
पॉप गायिका रिहाना ने जब भारत में जारी किसान आंदोलन की ओर दुनिया का ध्यान खींचना चाहा था तो लता जी ने उसे टि्वीट करके लताड़ा था।
सुना है वे व्यहार में बहुत अच्छी थीं। लेकिन उनका कोई सामाजिक सरोकार नहीं था। दुनिया कैसी होनी चाहिए, कौन सी ताकतें दुनिया के सुर को बिगाड़ती हैं और कौन इसे संवारने के लिए संघर्षरत हैं, इस बारे में उनका कोई विचार नहीं था।
दुनिया में आज तक किसी विचारहीन कलाकार ने इतिहास में स्थान नहीं बनाया है, चाहे वह अपने जीवन-काल में कितना भी महान क्यों न लगता रहा हो। लता जी निधन पर जो श्रद्धांजलियां उन्हें मिल रही हैं, वे अंतिम हैं। वे इतिहास के कूड़ेदान में वैसे ही जाएंगी, जैसे कोई टूटा हुआ सितार जाता है, चाहे उसने अपने अच्छे दिनों में कितने भी सुंदर राग क्यों न निकाले हों।