ओवरहालिंग में लाखों खर्च फिर भी नहीं रूक रहा गन्ने का रस – रिपोर्ट शुभम शर्मा

ओवरहालिंग में लाखों खर्च फिर भी नहीं रूक रहा गन्ने का रस – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – मिल प्रबधंन एवं कार्यदायी कंपनी बालाजी सोल्यूशन कंपनी के तकनीशियनों के लिए जर्जर साथा चीनी मिल को चलाना चुनौती बना हुआ है, क्योंकि साथा चीनी मिल ने जितनी देर गन्ने की पेराई नहीं की उससे ज्यादा तकनीकी खराबी के चलते बंद रही है। 25 दिसंबर को साथा चीनी मिल के नए सत्र की शुरूआत हुई जब से मिल दस बार बंद हो चुकी है। वहीं मिल की ओवर हालिंग पर 85 लाख रूपये खर्च होने के बाद भी मिल के अदंर गन्ने का रस एवं चीनी बह रही है। नए सत्र की शुरूआत में कार्यदायी कंपनी के प्रबंधन के द्वारा यह दावा किया जा रहा था 350 तकनीशियनों की टीम मिल को पूरी क्षमता के साथ चलाएगी। पिछले बार के सत्र की तरह इस बार खेतों एवं नालों में गन्ने का रस नहीं बहेगा व पूरी क्षमता से मिल शासन की तरफ से मिले लक्ष्य को निर्धारित समय पर पूरा करेगी लेकिन जिस प्रकार मिल चल रही है उस हिसाब से दावे खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन भानु गुट के प्रदेश महामंत्री डा. शैलेंद्र पाल सिंह ने तो मिल की ओवर हालिंग पर खर्च हुए लाखों रूपये की जांच की मांग भी की है। पिछले सत्र से एक माह लेट शुरू हुई साथा चीनी मिल की ओवरहालिंग के वक्त प्रबंधन के द्वारा बताया जा रहा था कि इस बार बायलर टयूब से लेकर जर्जर हो चुकी पाइप लाइनों को भी बदला गया है लेकिन जिस तरह से मिल के अंदर रस एवं चीनी बह रही है उससे ओवरहालिंग पर सवाल उठना लाजिमी है। अभी भी बायलर पूरी तरह से प्रेशर नहीं बना पा रहें है। जिसके चलते चीनी ज्यादातर ब्राउन बन रही है। पेराई सत्र शुरू होने से पहले यह माना जा रहा था मिल पूरी क्षमता से चलेगी। लेकिन आस पास के क्षेत्र में अच्छी गन्ने की खेती होने पर भी गन्ना किसानों के लिए कड़वा साबित हो रहीं है। इस सत्र में मिल को छह लाख कुतंल गन्ना की पेराई का लक्ष्य दिया गया है जो पिछले सत्र से एक लाख कुतंल अधिक है। लेकिन जिस हिसाब से मिल उतार -चढ़ाव के साथ चल रही है। उससे नहीं लगता मिल अपने दिए लक्ष्य को पा लेगी। इस सत्र के आंकड़ों पर गौर करे तो मिल अब भी घाटे में चल रही है क्योंकि एक कुतंल गन्नें की पेराई से 9.5 किलो सफेद चीनी तैयार होती है प्रबंधन के अुनसार यहां पर तो मिल ने एक लाख कुंतल गन्नें की पेराई तक कर दी लेकिन चीनी के नाम पर सिर्फ ब्राउन चीनी ही बन पाई है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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