एटा से गायब होते उधौग पर चर्चा
एटा जनपद उत्तर प्रदेश में जिस पार्टी के साथ रहा सत्ता उसीकी
एटा जनपद के विधायक/सांसद नल-नली में फंसा कर रखा करते जनपदबासिन्दो को

उत्तर प्रदेश का जनपद एटा चर्चा का विषय वन बैठा है, कि सरकारी अनुदान न मिल पाये के कारण सौतेला पन जनपद महसूस कर रहा है, एटा जनपद एक दषक में उधौग पर चला लेकिन 70सालो की आजादी के बाद नेताओं ने आजाद नही होने दिया ओर इसके पर कतर दिये,
उदाहरण के लिए जनपद एटा की तहसील जलेसर पीतल के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मार्केट में जाने के बाद भी सरकारी अनुदान न मिल पाये के कारण आज पीतल की नगरी मुरादाबाद बनगयी है,
तहसील अलीगंज लकड़ी की तम्बाकू अन्तर्राष्ट्रीय मार्केट में जाने के बाद भी सरकारी अनुदान न मिल पाये के कारण सौतेला पन महसूस कर रहा है,
एटा की नगर पंचायत/ब्लोक महारहरा में चूड़ियाँ की कई भट्टियों हुआ करती थी सरकारी अनुदान न मिल पाये के कारण सौतेला पन महसूस कर रहा है तथा एक्का-दुक्का भट्टी आज भी है, लेकिन सुहाग की नगरी फीरोजाबाद है,
जव बसपा को सन्2007 में एटा ने एक साथ सातो की सात एक साथ सीट जीत कर दी, तो एटा को ईनाम बसपा ने दिया एटा का अंग काट कर कासगंज को कांशीराम नगर वना दिया, ओर जनता को नल-नली में फंसा कर रखा था,
जनता ने एक वार अपना बदला लेने के लिए सपा को एटा-कासगंज छ: सीट झोली में डाली ओर सपा ने जनता को उधौग के नाम नल-नली दिया,
जनता समझ गयी फिर उसने फकीर की पार्टी को चुना एटा-कासगंज में एक साथ सातो की सात एक साथ सीट जीत कर फकीर नरेन्द्र मोदी की झोले में डाल दी,
उधौग तो दूर की बात नल-नली भी देने में नाकाम रहे विधायक/सांसद
लाखों रूपये में आग लगा कर नली मिली जिलाधिकारी एटा से
नहीं चाहिए वावा रे तेरी सरकार
चोट दर चोट सहता घायल का मुकदर है,
पाँव से लिपट कर बजती पायल का मुकदर है,
नैन में चैन से सोता ये काजल का मुकदर,
एक दीद/ उधौग के लिए उम्र भर तरसता ये जनपद एटा का मुकदर है