
क्या यूपी में यह विधायक नहीं लड़ सकेंगे चुनाव? एडीआर की रिपोर्ट जारी, सूची देखें ?
उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधायकों में से कुछ विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि वह 2022 में होने वाला चुनाव लड़ना उनके लिए संशय पैदा हो गई है।
उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधायकों में से कुछ विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि वह 2022 में होने वाला चुनाव लड़ना उनके लिए संशय पैदा हो गई है।
उत्तर प्रदेश के कुल 396 में से 45 मौजूदा विधायकों के चुनाव लड़ने पर संशय है। शुक्रवार को एसोसिएट डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) ने एक रिपोर्ट के बाद यह खुलासा हुआ है।
क्या 45 विधायकों पर लटकी तलवार?
एमपी-एमएलए कोर्ट में मौजूदा 45 विधायकों पर आरोप तय हो गये हैं।
जानकारी के अनुसार
आरपी अधिनियम (रिप्रेजेन्टेशन ऑफ पीपुल एक्ट/लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम) 1951 की धारा 8(1), (2) और (3) के तहत सूचीबद्ध अपराधों में यह आरोप तय हुए हैं। इन मामलों में कम से कम अगर छह महीने की सजा होती है तो यह मौजूदा विधायक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
पहली बार जारी की है एडीआर ने यह रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार चुनाव लड़ने की पात्रता या अपात्रता तय करने का अधिकार केवल केन्द्रीय चुनाव आयोग को होता है। लेकिन अगर इसके तहत दोषी पाएं जाते या सजा काटने, रिहाई के बाद कम से कम छह साल तक विधायक चुनाव नहीं लड़ सकते।
एडीआर की रिपोर्ट में भाजपा 32, सपा पांच, अपना दल व बसपा के 3-3 तथा कांग्रेस एवं अन्य दल के एक-एक विधायक शामिल हैं। इनमें शामिल 32 विधायकों के खिलाफ दस साल या उससे अधिक के समय में लगभग 63 आपराधिक मामले लंबित हैं एवं 45 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित रहने की औसत संख्या 13 वर्ष है।
-डा. संजय सिंह, मुख्य समन्वयक
देखें सूची में देखें क्रमशः सूची
पहले नम्बर पर रमाशंकर सिंह-भाजपा विधायक, मड़िहान विधानसभा दूसरे नम्बर मुख्तार अंसारी, बसपा विधायक मऊ, तीसरे नम्बर अशोक कुमार राना, भाजपा विधायक धामपुर से हैं। इसके साथ अजय कुमार लल्लू का नाम शामिल है जो कि मौजूदा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष है।
पढ़ें सूचीबद्ध अपराध 8 (1), (2) और (3) इनके तहत
भारतीय दंड संहिता, 1860 (आईपीसी) के तहत बलात्कार, डकैती, लूट, हत्या, अपहरण, रिश्वत, अनुचित प्रभाव, महिलाओं के ऊपर अत्याचार, धर्म, नस्ल, भाषा, जन्म स्थान के आधार पर अनेकों समूहों के बीच शत्रुता जैसे अपराध शामिल हैं। इसमें भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग, विनिर्माण/खेती/उत्पादन/ कब्जा, परिवहन, बिक्री, खरीद, भंडारण और/या किसी भी नशीली दवाओं के सेवन से संबंधित अपराध जमाखोरी और मुनाफाखोरी से संबंधित अपराध, भोजन और दवाओं में मिलावट, दहेज आदि से संबंधित अपराध भी शामिल हैं। इसके तहत इसमें दोषी ठहराया जाता है और कम से कम दो साल के लिए कारावास की सजा को भी इसमें शामिल किया गया है।
पढ़िये क्या होंगे इसके तहत अयोग्यता के पैमाने
1-इस एक्ट की धारा आठ (1) में दोषी ठहराए जाने पर अयोग्य
2-इस धारा के अर्न्तगत 8(2) में कम से कम 6 महीने की सजा के साथ दोषी ठहराए जाने पर आयोग्य घोषित
3-धारा 3-8(3) के तहत 2 साल से कम की सजा के साथ दोषी ठहराए जाने पर अयोग्य घोषित
एमपी-एमएलए कोर्ट बनने के बाद आई तेजी
ऐसा नहीं है कि यह पहले नियम लागू नहीं था। पहले भी अगर आरोप सही पाए जाने बाद अगर किसी को सजा मिल जाती तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है। लेकिन कोर्ट में लंबे समय तक मुकदमें चलने से यह बच जाते थे। अधिकतर जगहों पर अपराध तय होने को टाला जाता था। जिससे कई कई सालों तक मुकदमे चलते रहते थे। जिससे आरोप तय नहीं हो पाते थे।
आइऐ बताते हैं किस पर कितने साल मुकदमें चल रहे
1-रमा शंकर सिंह का इन पर 27 साल से मुकदमा चल रहा है लेकिन आज तक आरोप तय नहीं हो पाया।
-26 वर्ष से मुख्तार असांरी पर।
-25 वर्ष से अशोक राना पर।
- संजीव राजा पर 24 वर्ष
- 23 साल से कारिंदा सिंह पर।
अब देखिएं कितने साल पुराने मुकदमें चल रहे हैं लेकिन आरोप तय नहीं हो पाए।
उम्मीदवार छुपा लेते थे अपराधिक रिकार्ड
कई बार देखने को मिला है कि उम्मीदवार अपने अपराधिक रिकार्ड या सूचनाओं को छिपा लेता था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2018 में स्थापित हुई एमपी-एमएलए कोर्ट इस तरह की काफी शिकायतों के बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एमपी-एमएलए कोर्ट की स्थापना के आदेश दिया। उसके बाद शुरू हुई प्रक्रिया में तीन साल में इन विधायकों पर आरोप तय कर लिए गए।
इन विधायकों पर तय हुआ आरोप
नाम, विधानसभा क्षेत्र, पार्टी
मुख्तार अंसारी- मऊ-बसपा
अशोक कुमार राणा-धामपुर-भाजपा
राज कुमार पाल-प्रतापगढ़-अपना दल
सुरेश्वर सिंह-महसी-भाजपा
मो रिजवान-कुंदरकी-सपा
रमा शंकर सिंह-मड़िहान- भाजपा
सूर्य प्रताप-पथरदेवा-भाजपा
संजीव राजा-अलीगढ़-भाजपा
कारिंदा सिंह- गोवर्धन-भाजपा
तीन धाराओं में आरोप तय होने वाले विधायकों की सूची
सत्यवीर त्यागी-मेरठ-किठोर
मनीष असीजा-फिरोजाबाद-भाजपा
उमेश मलिक-बुढ़ाना-भाजपा
देवेन्द्र सिंह-कासगंज-भाजपा
नंद किशोर-लोनी भाजपा
अमर सिंह-शोहरतगढ़-अपना दल
हरिराम-दुद्धी- अपना दल
राजेश मिश्र-बिथरी चैनपुर-भाजपा
बाबू राम-पूरनपुर-भाजपा
मनोहर लाल-मेहरौनी-भाजपा
बृजभूषण -चरखारी-भाजपा
राजकरन-नरैनी-बांदा
वीरेन्द्र-एटा-भाजपा
विक्रम सिंह-खतौली-भाजपा
धर्मेन्द्र कु सिंह शाक्य-शेखुपुर-भाजपा
राम चंद्र यादव-रुदौली-भाजपा
गोरखनाथ-मिल्कीपुर-भाजपा
इंद्र प्रताप-गोसाईगंज-भाजपा
अजय प्रताप-कर्नलगंज-भाजपा
अभय कुमार-रानीगंज-भाजपा
राकेश कुमार-मेंहदावल-भाजपा
संजय प्रताप जायसवाल-रुधौली-भाजपा
श्रीराम-मोहम्मदाबाद गोहना-भाजपा
आनंद-बलिया-भाजपा
सुशील सिंह-सैयदरजा-भाजपा
रवीन्द्र जायसवाल-वाराणसी उ-भाजपा
शैलेन्द्र यादव ललई-शाहगंज-सपा
प्रभुनाथ यादव-सकलडीहा-सपा
भूपेश कुमार-राबर्ट्सगंज-भाजपा
सुरेन्द्र मैथानी-गोविंदनगर-भाजपा
असलम अली-धोलना-बसपा
मो असलम-भिनगा-बसपा
अजय कुमार लल्लू-तमकुहीगंज-कांग्रेस
विजय कुमार-ज्ञानपुर-अन्य दल
राकेश प्रताप सिंह-गौरीगंज-सपा
मैं राजनीतिक दलों से अपील करता हूं कि वे इन विधायकों को टिकट न दे। हमने सिफारिश की है कि जघन्य अपराधों में आरोप सिद्ध होने के बाद चुनाव लड़ने पर स्थायी तौर से रोक लगाई जाए।
-संजय सिंह, वॉच मुख्य समन्वयक, एडीआर व यूपी इलेक्शन