पीतल मूर्ति कारोबार हुआ फीका, कारोबारी चिंतित – रिपोर्ट शुभम शर्मा

पीतल मूर्ति कारोबार हुआ फीका, कारोबारी चिंतित – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – ब्रास स्टेच्यू व मूर्ति निर्माता एंड सप्लायर एसोसिएशन की सोमवार को रामघाट-कल्याण मार्ग स्थित होटल आभा रीजेंसी में बैठक हुई। जहां रा मेटेरियल की बढ़ती कीमतों को लेकर कारोबारियों ने दिनों दिन पीतल मूर्ति कारोबार की फीकी चमक पर चिंता व्यक्त की। डेढ़ साल में पीतल की मूर्ति का रेट तीन गुन तक बढ़ गया है। कोयला की दाम डेढ गुना बढ़ गए है। कोरोना संकट से पहले 32 रुपये किलो तक बिकने वाला कोयला अब 52 रुपये तक बिक रहा है। अध्यक्ष विष्णु अग्रवाल ने कहा कि ने कहा कि पीतल की मूर्ति में सबसे ज्यादा भूमिका ढलाई होती है। ऐसे कुशल कारीगराें की भारी कमी चल रही है। मैन पावर कम हाेने से कई विसंगतियों से जूझना पड़ रहा है। इसके लिए सरकार हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षित किया जाए। नई युवा पीड़ी इस क्षेत्र में आना नहीं चाह रही है। सरकार से प्रोत्साहन की जरुरत है। पीतल की लगातार बढ़ती कीमतों ने लागत मूल्य बढ़ा दिया है। इससे ग्राहकों का बजट कम हो रहा है। उपाध्यक्ष हनुमंत राम गांधी ने कोयला की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त कर शहर में गैस पाइप लाइन सेवा शुरू करने की मांग की है। ढलाई के काम से जोड़ने के लिए हस्तशिल्पियों को सरकार से प्रशिक्षण दिए जाने की मांग की है। संगठन सचिव संजीव गुप्ता ने कोयले की बढ़ती कीमतों को काबू में करने की मांग की है। संगठन कोषाध्यक्ष योगेश गुप्ता ने बताया कि कुशल कारीगर नेपाल के लिए पलायन कर रहे हैं। इससे कुशल कारीगरों का घनघौर संकट गहराता जा रहा है। मीडीया प्रभारी मोहित राठी ने बताया कि नेपाल में हस्तशिल्पियों को ज्यादा वेतन दिया जा रहा है। इससे उनका पलायन हो रहा है। पीतल की कीमत स्थिर न होने से कारोबार में अनिश्चिता का दौर है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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