
सामूहिक विवाह योजना में सूची देने से कतरा रहे अधिकारी – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जिले में बड़े फजीवाड़े की आशंका है। शादी समारोह के 10 दिन बीत जाने के बाद भी लाभार्थियों की सूची अब तक जिला स्तरीय अफसरों के पास नहीं आ सकी है। ब्लाक स्तर के अधिकारी ही इसे दबाए बैठे हैं। अफसरों के फोन करने व पत्र लिखने के बाद भी यह सूची जिला स्तर पर नहीं भेजी जा ही है। ऐसे में आशंका है कि जान बूझ कर सूची लटकाई जा रही है। गरीब बेटियों के हाथ पीले करने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना संचालित कर रखी है। इसमें एक शादी पर 51 हजार की धनराशि खर्च होती है। ब्लाक, नगरीय निकाय व जिला पंचायत में इसके लिए अावेदन होते हैं। सत्यापन की जिम्मेदारी भी इन्हीं के स्तर पर पूरी होती है। पिछले दिनों ब्लाक व निकायों के डिमांड के आधार पर जिला स्तर पर एक सामूहिक विवाह कराया गया था। इसमें कुल 495 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे थे। अफसर व जनप्रतिनिधियों ने इन्हें आशीर्वाद दिया था। नियमानुसार शादी समारोह आयोजित होने के अगले दिन ही ब्लाक स्तर से लाभार्थियों की यह सूची जिला स्तर पर भेजी जानी चाहिए थे। इसी सूची के आधार पर जिला स्तरीय अफसर ब्लाकों को बजट जारी करते हैं, लेकिन सोमवार तक शादी समारोह हुए 10 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक यह सूची जिले पर नहीं आई है। इसके चलते बजट भी जारी नहीं हो पा रहा है। जानकारों के अनुसार ब्लाक स्तर पर शादी समारोह के लिए नाम तो दे दिए गए, लेकिन अब तक सूची बनाने में पसीने छूट रहे हैं। आशंका है कि दर्जनों नाम तो ऐसे हैं, जिन्हें बिना जांच पड़ताल के ही योजना का लाभ दे दिया गया। अब जिला स्तर पर ऐसे लाभार्थियों की सूची देने में पसीने छूट रहे हैं।