
नगर निगम में सफाई कर्मियों के 95 हजार पद पड़े हैं खाली – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – शहरों की स्वच्छता व्यवस्था सफाई कर्मचारियों के भरोसे होती है। यही पर्याप्त संख्या में न हों तो व्यवस्था के लड़खड़ाने की संभावना बनी रहती है। प्रदेश में सफाई कर्मचारियों के 95 हजार पद रिक्त बताए जा रहे हैं। कर्मचारी यूनियन लंबे समय से एक लाख कर्मचारियों की नियुक्त करने की मांग कर रही हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि आबादी के अनुसार कर्मचारी नियुक्त किए जाएं, तभी व्यवस्था बेहतर हो सकेगी। वहीं, संविदा कर्मियों को नियमित किया जाना आवश्यक है। सरकार ने इसके आदेश तो दिए हैं, लेकिन 2001 तक कार्यरत कर्मचारियों को ही स्थाई किया जा रहा है। इस पर कर्मचारी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। अलीगढ़ में 2006 से संविदा सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। इन्हें लाभ नहीं मिल जाएगा। स्थानीय निकाय सफाई मजदूर संघ के प्रांतीय अध्यक्ष मानिक लाल नागर ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की खुली उपेक्षा हो रही है। संगठन 2006 से कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारियों को स्थाई करने की लगातार मांग कर रहा है। जबकि, सरकार ने 30 दिसंबर, 2001 के कार्यरत संविदा कर्मचारियों को स्थाई करने का आदेश जारी किया है। प्रांतीय महामंत्री बिल्लू चौहान ने कहा कि सरकार ने हर विभाग में रिक्त पदों पर भर्तियां हो रही हैं। लेकिन, स्थानीय निकायों में स्थाई सफाई कर्मचारियों के 53 हजार पद रिक्त पड़े हैं, 40 हजार संविदा सफाई कर्मचारियों के पद रिक्त हैं, एक हजार नवीन नगर पालिका, नगर पंचायतों में भर्तियां रुकी हुई हैं। कुल 95 हजार पद रिक्त हैं। संगठन लगातार मुख्यमंत्री से प्रदेश की निकायों में एक लाख सफाई कर्मचारियों की भर्ती की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार हर चेहरे पर मुस्कान लाना चाहती है, लेकिन समाज को स्वच्छ रखने वाले सफाई कर्मचारियों की उपेक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री से संगठन मांग करता है कि 2006 से कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारियों को स्थाई किया जाए, ठेका सफाई कर्मचारी को संविदा में परिवर्तित किया जाए, प्रदेश की निगाहों में एक लाख सफाई कर्मचारियों की भर्ती के आदेश किया जाए। सरकार 30 दिसंबर तक इन मांगों को नहीं मानती तो संगठन भाजपा हटाओ अभियान की रणनीति तय करेगा। इसको लेकर प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक शीघ्र तय की जाएगी। सरकार को सफाई कर्मचारियों की उपेक्षा करने की कीमत चुकानी होगी।