_”फर्नीचर बनवा कर मजदूर की मजदूरी डकार गए थे एसआई व कोतवाल साहब”
क्रॉसर……
चार वर्ष बीत जाने के बाद भी गरीब मजदूर को नही मिला न्याय
बेहद तंगहाली से गुजर रहा मजदूर का परिवार
एएसपी की जांच में दोनों पुलिसकर्मी पाए गए दोषी”__
क्रॉसर……
“मिस्त्री ने जब मजदूरी मांगी तो उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की दी थी धमकी!”

लखीमपुर-खीरी।आज से करीब तीन वर्ष पूर्व मैगलगंज कोतवाली में तैनात एक इंस्पेक्टर व एसआई ने मजदूरी करने वाले कारपेंटर से करीब तीन लाख का फर्नीचर बनवाया उसके बाद जब मिस्त्री ने अपनी मजदूरी मांगने की कोशिश की तो मात्र पचास हजार रुपए देकर उसे थाने से भगा दिया तब से पीड़ित लगातार उच्चाधिकारियों के दफ्तरों की गणेश परिक्रमा कर चक्कर काटता रहा। किसी ने सच ही कहा है कि सच्चाई छिप नहीं सकती बनावट के उसूलों से कि खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से। आखिरकार अपनी बातों पर अडिग रहे गरीब पेशा मजदूर कारपेंटर सुशील को काफी जद्दोजहद के बाद न्याय मिलते साफ दिख रहा है। बता दें कि अपनी तैनाती के दौरान बतौर थाना प्रभारी निरीक्षक मैगलगंज में मैगलगंज थाना परिसर के सरकारी आवास में तीन वर्ष पूर्व वहां तैनात इंस्पेक्टर घनश्याम राम व एसआई सुरेंद्र सिंह के खिलाफ चल रही विभागीय जांच आखिरकार पूरी हो ही गयी। जांच कर रहे एएसपी अरुण कुमार सिंह ने अपनी निष्पक्ष जांच में दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। जानकारी के अनुसार कस्बे के बरगांवां रोड निवासी कारपेंटर सुशील विश्वकर्मा ने डीजीपी को दिए प्रार्थना पत्र में शिकायत की थी कि मैगलगंज कोतवाली में तैनात तत्कालीन इंस्पेक्टर घनश्याम राम व एसआई सुरेंद्र सिंह ने अपना घरेलू फर्नीचर उससे बनवाने हेतु तीन लाख रुपयों में ठेका दिया था। ठेके के मुताबिक सुशील कुमार ने सरकारी आवास में रंदा मशीन व अन्य उपयोगी मशीनों को लगाकर अपने अन्य मजदूर साथियों के साथ घरेलू व इमारती सामान कीमती सागौन की लकड़ी से तैयार किया था। इस दौरान कारपेंटर को महज 50 हजार रुपए दिया गया था। पीड़ित कारपेंटर का आरोप है कि शेष बकाया ढाई लाख रुपए मांगने पर दोनों अधिकारियों द्वारा उसका उत्पीड़न किया जा रहा था। फर्जी मुकदमों में फंसा देने की धमकी तक दी गई थी। पुलिस के खौफ से वह इस हद तक डर गया कि पलायन को मजबूर हो गया।किसी का साथ न मिलते देख मजबूरी में उसने राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री, मानवाधिकार को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई।जिसमें एएसपी ने मामले की जांच करने के बाद इस बात की पुष्टि की है कि दोनों पुलिस अधिकारियों द्वारा थाना परिसर के आवास में फर्नीचर बनवाया गया,जिसकी मजदूरी कारपेंटर को नहीं दी गई। मामले में दोनों पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए हैं।
पीड़ित कारपेंटर – 9621775837