सम्पूर्ण विश्व के अस्तित्व हेतु अपरिहार्य हैं पेड़-पौधे- राजू आर्य
●प्रकृति प्रदत्त वृक्षों की रक्षा सिर्फ सरकार का ही नही, प्रत्येक व्यक्ति का है कर्तव्य।
●”एक वृक्ष- एक संकल्प” के उद्देश्य को जीवन में अपनाएं।
एटा।भारतीय पत्रकार संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं विहिप नेता रंजीत कुमार उर्फ राजू आर्य ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर कहा कि ईश्वर द्वारा बनाई गई धरती की हरी-भरी गोद हमें हमारे पूर्वजों के पुण्य कार्यों के कारण मिली थी। हमारा भी दायित्व बनता है कि आने वाली पीढ़ी के लिये हम वृक्षारोपण के माध्यम से धरती माता की गोद को हरी-भरी करें। जन्म से लेकर अंतिम यात्रा तक वृक्षों का हमारे जीवन में अमिट योगदान रहता है, इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि जिस प्रकार पेड़-पौधे हमें जीवन-दायी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं उसी प्रकार हमें भी इनका संरक्षण करना चाहिए।
आर्य ने कहा कि प्रकृति की अनमोल देन इन पेड़ पौधों को बचाने के साथ साथ प्रत्येक भारत-वासी को संकल्प करना चाहिए कि वे अपने जीवन में कम से कम एक छायादार वृक्ष लगाएं और उसकी देखरेख करें।
आर्य ने कहा कि “एक वृक्ष – एक संकल्प” का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को अपनाना चाहिए। आज विश्व भर में मानव ज़रूरतों की पूर्ति के लिए किया जा रहा जंगलों का कटान प्रकृति को बहुत हानि पहुंचा रहा है, जिससे मानव जीवन भी संकट में पड़ गया है। पूरे विश्व का औसत तापमान बढ़ गया है, ग्लेशियर तेज़ी से पिघलना शुरू हो गये हैं। जंगलों की कटाई होने से विश्व भर में बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं अब भयानक रूप लेती जा रही हैं, ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक समस्याओं का मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण है जो कि वृक्षों के घटते घनत्व के कारण हो रहा है। ओजोन लेयर का विघटन भी कई बीमारियों को जन्म दे रहा है और यह सब परिणाम है प्राकृतिक देन के दोहन का।
आर्य ने कहा कि सरकार समय-समय पर ऐसे कई वृक्षारोपण के कार्यक्रम आयोजित करती है साथ ही कई ऐसे सामाजिक संगठन हैं जो प्रकृति को बचाने के अभियान में लगे हुए हैं लेकिन हमें समझना होगा कि यह पूरी तरह नाकाफी है। इसके लिए ज़रूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति इसके प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे और पेड़ पौधों की रक्षा के साथ साथ वृक्षारोपण करने का दृण संकल्प ले और इस अभियान में सरकार और बाकी सामाजिक संगठनों द्वारा प्रकृति को बचाने के प्रयास को गति प्रदान करें। साथ ही आर्य ने कहा कि प्रकृति की रक्षा एवम वृक्षारोपण को सिर्फ औपचारिकता न समझी जाए बल्कि इसे अपने जीवन में अनिवार्यता दी जाये। जिससे कि सम्पूर्ण जीव जगत के लिए ज़रूरी प्रकृति प्रदत्त धरोहर पेड़ पौधों की संख्या और घनत्व को बढ़ाया जा सके ताकि धरती पर जीवंत सभी प्राणी प्रकति के आशीष के साथ जीवन व्यतीत कर सके।