सार्वजनिक थूकने पर जुर्माना, लेकिन रूलों के मुंह पर थूकता आदमी
लोकडाउन खुल गया है,घरसे निकलते बक्त अपने माता, पिता,का आशीर्वाद लेकर जरूर निकले,क्यों कि मात्र दुआऔं मे जिंदगी शेष बची है,और मुफ्त मे तो आजकल कोई गाली भी नहीं देता इस लिये माता, पिता,के—अबतक चाहर दीवारों मे कोरोना से इंसान का बचाव था लेकिन, अब लोकडाउन खुल गया,आप तस्वीरों मे देखे या रियलिटी मे न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है ना ही सार्वजनिक थूकना बंद हुआ है ना ही हर इंसान मास्क पहन कर निकल रहा है मार्केट की पतली पतली गलियों में टू व्हीलर वाहनों का इतना जमावड़ा लगा हुआ है कि महिला बच्चों और इंसानों का निकलना मुश्किल हो जाता है तब क्या होगा आदमी का यह कहने की शायद अब आवश्यकता नहीं है,पहले शराब, फिर गुटखा, धूम्रपान, जहर तो पहले ही परोस दिया है,सर्मनाक तो वह रूल हो रहे है जो बैन करने के वावजूद भी खुले आम कानूनी उल्लंघन हो रहा है,आज जमीन का एसा कोई हिस्सा सुद्ध नहीं बचा है,थूक से कि आदमी के पांव बचाकर निकल सके, सबसे बड़ा बेक्टेरिया तो यही थूक है जो जुर्माने के एनाउंस के बाद भी रूलो के मुंह पर थूक रहा है,आदमी।