
मंत्रियों को तो घर के दरवाजे खुले रखने के निर्देश, आप भी तो जनता दरबार लगाने की करो शुरुआत। मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के बाद अब जनता चाहती है अपने काम!खुद मुख्यमंत्री आज गुजरात और मुंबई के दो दिन के दौरे पर है।वहीं अधिकांश मंत्री भी अपने क्षेत्र के दौरे पर गए हुए है।। तीन मंत्रियों के बयान के बाद सोशल मीडिया पर छाए तीनों मंत्री {{{{0091}}}} प्रदेश में मंत्री मंडल पुनर्गठन के बाद अब प्रदेश की जनता चाहती है उनके अटके हुए काम होने चाहिए। हांलांकि प्रदेश में प्रशासन गांव के संग और प्रशासन शहरों के संग अभियान चल रहे हैं। मगर इन शिविरों में धीमी गति और लक्ष्य के अनुसार काम नहीं होने से पहले तो खुद मुख्यमंत्री ने ही नाराजगी जता दी थी। और उसके बाद वे खुद कुछ क्षेत्रों में शिविर का अवलोकन करने भी निकल गए थे। इसी के साथ सीधा जनता से जुड़ा हुआ स्वायत शासन विभाग भी चर्चाओं में रहा जब खुद मंत्री ने कुछ शिविरों में भाग लेकर कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई। इतना ही नहीं उन्होंने मौके पर ही कुछ अधिकारियों को निलंबित कर दिया, कुछ तो दूसरे स्थान पर भेज दिया और कुछ को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए। एक-दो दिन पहले ही खुद मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने भी शिविरों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश देकर शिविर को सफल बनाने के लिए और गति पकड़ने के लिए निर्देश दिए। इसी बीच गहलोत मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के बाद मंत्री मंडल की पहली बैठक में बुधवार को मंत्रियों को निर्देश दिए जिसमें स्पष्ट कहा कि जनता के लिए दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए। मंत्री के निवास पर पहुंचने वाले प्रदेश के लोगों को अपनी बात मंत्री तक पहुंचने का मौका मिलना चाहिए। इसी के साथ पीसीसी में भी जनता दरबार लगाने पर विचार किया जा रहा है। जरूरत इस बात की है कि अब लगभग दो साल से बंद पड़े मुख्यमंत्री के आवास पर लगने वाले जनता दरबार को भी फिर से शुरू किया जाए। फिलहाल तो मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर स्वागत सत्कार में लगे हुए हैं। स्वागत के दौरान कुछ मंत्रियों द्वारा दिए गए बयानों के बाद सोशल मीडिया पर इन बयानों को लेकर जबरदस्त चर्चाएं चल रही है। नए चिकित्सा और आबकारी मंत्री परसादी लाल मीणा ने तो यहां तक कहा बताया कि जहरीली शराब से मरने से अच्छा है सरकारी सिस्टम से शराब पियो। मंत्री जी ने कहा कि पटना में शराबबंदी है वहां लोग शराब बंदी से मर रहे हैं। मरने से तो अच्छा है सरकारी सिस्टम से शराब लेकर पी लो। पीनी है तो पियो और नहीं पीनी हो तो मत पीओ। मंत्री जी हम आपको बता दें कि शराबबंदी न केवल पटना में बल्कि पूरे बिहार में हैं। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एक सप्ताह पहले संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर शराबबंदी की पूर्ण पालना करने, तस्करी रोकने और नकली शराब बिक्री और बनाने के खिलाफ सख्त कार्यवाही के आदेश दिए थे। नितीश बाबू ने तो इतना तक कह दिया था कि जिस क्षेत्र में अवहेलना पाई गई तो उस क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आप तो इतना करो कि रात को 8:00 बजे बाद भी चोरी छुपे दुकानें की शटर ऊपर नीचे कर शराब बिक्री पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों को पाबंद कर दो। दूसरे मंत्री जो ग्रामीण विकास राज्य मंत्री हैं माननीय राजेंद्र गुड्डा जी उन्होंने निर्माण विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया कि मेरे गांव में हेमा मालिनी के गाल जैसी सड़क बननी चाहिए। इतना ही नहीं मंत्री जी ने तो यह भी कह दिया की हेमा मालिनी बूढ़ी हो गई है और जनता से पूछ लिया कि आजकल कौन सी एक्ट्रेस है लोगों ने भी जवाब देने में कोई कमी नहीं रखी और कहा कैटरीना। तो मंत्री जी ने भी फट से कह दिया कि कैटरीना के गालों जैसी ही सड़क बननी चाहिए। यह सोचने प्रश्न है कि जहां प्रियंका गांधी महिलाओं को उत्तर प्रदेश में 40% आरक्षण दिलाने ( उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में 40% महिलाओं को टिकट देने) की घोषणा की है तो फिर महिलाओं को लेकर उनकी ही पार्टी की सरकार के मंत्रियों द्वारा इस तरह की बातें करना कहां तक उचित है। मुख्यमंत्री के सलाहकार बने नवलगढ़ के विधायक डॉक्टर राजकुमार शर्मा जो अपने क्षेत्र के सशक्त विधायक हैं। मंत्री भी रह चुके हैं उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि क्या पीएम मोदी इतने कमजोर है कि 15 सलाहकार बना रखे हैं। जिनमें नाचने वाली कंगना रनौत भी शामिल है! अगर पुनर्गठन के बाद इसी तरह की गतिविधियां जारी रही तो प्रदेश की जनता में क्या संदेश जाएगा! आगे चुनाव भी सर पर है। अब देखने वाली बात यह होगी कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति कब तक होती है और किन-किन को उसमें गाड़ी घोड़ों की सुविधा मिल सकती है! और क्या अधिकार दिए जाते है!