विश्व पर्यावरण दिवस 5जून पर विशेष
पर्यावरण की रक्षा किये बिना धरती नहीं बचेगी
–ज्ञानेन्द्र रावत
आज हम प्रकृति की अनदेखी कर रहे हैं। उसके कारण धरती का असंतुलन एक खतरनाक मोड़ पर आ पहुंचा है। बढ़ती आबादी, नित नयी वैज्ञानिक सोच, असंतुलित विकास, सुख-सुविधाओं की चाहत की अंधी दौड़ और हमारी स्वार्थपरक सोच ने धरती को विनाश के कगार पर पहुंचा दिया है। इसका दुष्परिणाम प्रकृति प्रदत्त संसाधनों पर अत्याधिक दबाव और जीव जंतुओं -वनस्पतियों की हजारों-हजार प्रजातियों की विलुप्ति के रूप में हमारे सामने आया है। इसके बावजूद हम धरती जो हम सबका घर है, के बारे में नहीं सोच रहे हैं।
इसमें दो राय नहीं कि पर्यावरण बचाने की मुहिम आज भी अनसुलझी पहेली है। दुनिया के वैज्ञानिकों के शोध- अध्ययन इस बात के सबूत हैं कि हालात बहुत भयावह हैं। इस दिशा में ग्लोबल वार्मिंग के खतरों को नजर अंदाज करना बहुत बड़ी भूल होगी। इसलिए सबसे पहले हमें अपनी जीवन शैली पर पुनर्विचार करना होगा, अपने उपभोग के स्तर को कम करना होगा। स्वस्थ जीवन के लिए प्रकृति के करीब जाकर सीखना होगा। यह जानना होगा कि यह सब दुर्दशा मानव और प्रकृति के विलगाव की परिणति है। जरूरी यह है कि सरकारें विकास को मात्र आर्थिक लाभ की दृष्टि से न देखें, बल्कि पर्यावरण को विकास का आधार बनायें। अगर हम अब भी नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं जब मानव अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा। इसलिए आज के दिन हम संकल्प लें कि हम पृथ्वी के प्रहरी बनकर पर्यावरण बचाने का हर संभव प्रयास करेंगे। उस दशा में ही हम धरती को लम्बी आयु और मानव सभ्यता की रक्षा करने में समर्थ हो सकते हैं।