#यूपीएटा- ये प्रसस्त पत्र भूँख के आगे सिर्फ एक कागज के टुकडे़ से ज्यादा कुछभी तो नहीं है क्यों कि भूँख सिर्फ और सिर्फ निवाला मांगती है साहब–

एटा-कमशान के पास हजारा नहर पर जुगेंद्र और रवेंद्र दोनों सगे भाई,2003,से आत्महत्या और हादसों से ग्रस्त लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर बचाते आ रहे है,जहां आप देख सकते हैकि यह इतने बड़े-बड़े मगरमच्छों के रहते हुये भी इनके ऊपर मानवता का जुनून और ऊपर बाले की असीम कृपा हैकि ये दोनों भाई बेखौफ होकर उफनती नहर मे इंसानों की जान बचाने कूद जाते है,तब दूसरों को बचाते-बचाते यह दोनों इन मगरमच्छों का खुदभी तो निवाला बन सकते है कभी भी लेकिन सर्मनाक तो हमारी शासन और प्रशासन की नीयत और राजनीतिक हो रही है कि इन गरीबों के लिये कुभी नहीं है और अमीरों के लियेअनगिनत योजनाएं है परिणाम के तौर पर यह दोनों भाई हमारे सामने हैकि2003, से किसी भी सरकार की इन गरीबों पर नजर नहीं गई ये स्वार्थ नीति किसे इग्नोर करती जा रही है किसी दिन खुदपर पड़ी तो ऐसा नाहो कि इन्हीं गरीबों के आगे आप जैसे कुवेर अपनों की जान बचाने के लिये इनके ही आगे—-क्यों कि अब शासन, और प्रशासन की राजनीति अहम,स्वार्थ,और अंधता, का परिचय दे रही है, क्यों कि हदसे पार तो कोई रास्ते होते ही नहीं है,सर्मनाक राजनीति, रोटी की जगह प्रसस्त पत्रों से इन्हें सम्मानित किया जाता है, जो भूँख के आगे सिर्फ और सिर्फ अबतक एक कागज के टुकडे़ से ज्यादा कुछ भी तो साबित नहीं हो सका काश इस कागज पर रोटी भी रख देते इन गरीबों के हाथ मे जो इनके साथ कोई खुदानाखास्ते हादसा होजाए तो इन गरीबों के बच्चे हमारे दरवाजों पर कटोरा लेकर तो आने के लिये मजबूर ना हो।