अलीगढ़ की प्रसिद्ध श्रीराम लीला में इस बार सरयूपार लीला का नहीं होगा मंचन

अलीगढ़ की प्रसिद्ध श्रीराम लीला में इस बार सरयूपार लीला का नहीं होगा मंचन
श्री रामलीला गोशाला कमेटी, अचलताल की ओर से आयोजित होने वाली रामलीला का शुभारंभ पांच अक्टूबर से हो रहा है।कोरोना के चलते इस बार कोई सवारी और शोभायात्राएं नहीं निकलेगी। साथ ही सरयूपार लीला का भी मंचन नहीं होगा। करीब 100 वर्ष में यह दूसरी बार हो रहा है, जब सरयू पार लीला का मंचन नहीं होगा। पिछले साल भी कोरोना के चलते सरयूपार लीला नहीं हो पाई थी। रावण दहन भी नुमाइश की जगह अचलताल स्थित रामलीला मैदान में होगा।अचलताल की रामलीला का इतिहास 100 वर्ष से भी अधिक समय से है। आजादी से पहले भी यहां बड़े उत्साह के साथ रामलीला महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है। श्री रामलीला गोशाला कमेटी के उपाध्यक्ष विमल अग्रवाल बताते हैं कि यहां की सरयू पार लीला पूरे पश्चिमी यूपी में प्रसिद्ध है। प्रभु श्रीराम को वनवास होने पर सरयूपार लीला का मंचन किया जाता है। अचल सरोवर में नाव से प्रभु श्रीराम, माता सीता और अपने भाई अनुज के साथ सरोवर को पार करते हैं। इसकी भव्यता को देखते हुए नगर निगम और प्रशासन भी सहयोग करता है। मथुरा से नाव मंगवाई जाती है, उसे आकर्षक तरीके से सजाया जाता है। वरिष्ठ समाजसेवी राजा राम मित्र बताते हैं कि करीब 70 वर्ष से वह सरयूपार लीला देखते आ रहे हैं। पहले लाइट की उतनी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए लालटेन से सरयूपार कराया जाता था। फिर धीरे-धीरे आधुनिकता बढ़ी और लाइटें जगमगा उठीं। अब तो सरयूपार की लीला देखकर मन आनंदित हो उठता था। मगर, इस बार भी सरयूपार लीला देखने को नहीं मिलेगी। इससे श्रद्धालुओं में मायूसी है। विमल अग्रवाल का कहना है कि तीन महीने पहले से तैयारी शुरू होती है, तभी इतना भव्य आयोजन हो पाता है। इस बार अचल सरोवर में काम भी चल रहा है, इसलिए सरयूपार लीला नहीं हो पाएगी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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